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Friday, October 30, 2009

आयु बढा़ने का गुर अब आपके पास

कहते हैं कि जनम और मरण ये दोनों प्रक्रिया ईश्वर ने अपने हाथ में ही रखी हुई हैं , तभये आवागमन की प्रक्रिया में कौन कब आता है - कब जाता है ,सभी इससे अनजान हैं ।मगर हमारी वैज्ञानिक बिरादरी है कि वह ईश्वर के इस एकाधिकार में सेंध लगाने के पुरजोर प्रयास में लगी रहती हैं । वैज्ञानिक किसी हद तक तो अपने प्रयासों में सफल भी हुए हैं ,परिणाम के तौर पर टेस्ट ट्यूब व अन्य दूसरी आर्टिफिशियल तकनीक के माध्यम से बच्चे को जन्म देने में सफल हुए हैं । लेकिन मरकर इंसान कहां जाता है इसका इनके पास अभी कोई जवाब नहीं । यह भी माना जाता है कि ईश्वर ने जितनी सांसे लिखकर हमें जमीं पर भेजा है हम उतनी सांसे ले पाते हैं उससे ज्यादा नहीं ।यह सब जानते हुए भी हमें ज्यादा से ज्यादा जीने की ललक रहती है । और जीने की तमन्ना रखने वालों के लिए एक अच्छी खबर है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि यदि आप पांच वैश्विक खतरों से लड़ जाएं तो आपके पांच साल अधिक जीने की सम्भावना बढ़जाएगी ।
संगठन की ”मोर्टेलिटी एंड बर्डेन ऑफ डिजीज की को - ऑर्डीनेटर ऑलिन मेथेर्स का कहना है कि आठ जोखिम घटकों की वजह से ७५ प्रतिशत दिल की बीमारियां होती हैं जो मौत का कारण बनती हैं ,इनमें शराब पीना , हाई ब्लड प्रेशर ग्लूकोज , तंबाकू सेवन , उक्त रक्त चाप , हाई बॉडी इंडेक्स , हाई कोलेस्ट्रोल , फल - सब्जियों का कम सेवन और व्यायाम नहीं करना है ।
संगठन की रिपोर्ट के अनुसार कम वजन के नवजात , असुरक्षित सेक्स , शराब व गंदे पानी का सेवन ,खुले स्थान पर शौच और उक्त रक्तचाप जैसे खतरों से बचकर रहा जाए तो आम आदमी अपनी औसत उम्र को बढ़ा सकता है । अब हुई न अपनी आयु को बढा़ने की चाबी [गुर] आपके हाथ । खैर जो भी आयु लंबी हो या न हो मगर इन व्यसनों से बचने पर आप निरोगी काया के मालिक जरूर बन सकते हैं ।

3 comments:

अविनाश वाचस्पति said...

जन्‍म और मरण की सारी प्रक्रियाएं ईश्‍वर ने अपने हाथ में नहीं अपने सुपर कंप्‍यूटर में ही रखी होंगी। हाथ में बल्कि हाथ की ऊंगलियों और अंगूठों के तले तो कीबोर्ड ही रखा जाना चाहिए। अब वो बात दीगर है कि भगवान इसलिए महान है क्‍योंकि उसे ये सब कार्य रिमोट वो भी मन से, अगर भगवान को भी एक अदद मन का स्‍वामी मानें तो, संचालित करने होते होंगे।
अब जिस तरह ईश्‍वर ने इंसान को छोड़ा है तो उस के लिए बीमारियां भी छोड़ दी हैं। अब यह तो हो नहीं सकता कि इंसान तो पृथ्‍वी पर छोड़े परन्‍तु बीमारियां चांद या मंगल पर छोड़े।
खतरों से अगर बचेगा तो जीवन बढ़ेगा और जीवन बढ़ेगा तो फिर शराब का सेवन ही करेगा और बाकी लतों में भी घिरेगा इसलिए आयु बढ़ाने का कोई लाभ दिखलाई तो नहीं दे रहा है।
फिर क्‍यों आयु बढ़ाने के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिसने सादगी से जीना है उसके लिए इतना जीना ही काफी है। ज्‍यादा वे ही जीना चाहते हैं जो इन सब व्‍यसनों में लिप्‍त रहते हैं।
खैर ... एक उपयोगी पोस्‍ट। पर अपुन का नजरिया तो ऐसा ही है। मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता यह सब भगवान के हाथ में है। उसका हाथ जगन्‍नाथ।

संगीता पुरी said...

आयु बढाने का गुर पर शोध करना छोडकर स्‍वस्‍थ रहने के गुर पर शोध किया जाए .. आज कम उम्र में ही लोगों को इतनी सारी बीमारियों से जूझना पड रहा है .. अधिक उम्र तक जीकर क्‍या करे ??

राकेश 'सोऽहं' said...

इस उपयोगी पोस्ट को पढ़ने पर मुझे अपनी ही कविता 'न घात करें' की कुछ पंग्तियाँ याद आती हैं -

छलके प्याले जाम के,
कुछ तुम पियो, कुछ हम पियें .

जीवन की सच्चाई समझ परे,
जिया जो जी-भर पार लगे .
जीवन है चलना और बस,
कुछ तुम चलो, कुछ हम चलें .

उपयोगी पोस्ट की बधाई स्वीकारें .