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Wednesday, May 4, 2011

...........बादलों पे हो घर अपना.............



सपने हर कोई संजोता है , यह बात और है कि किसी के सपनों को पंख लग जाते हैं तो  किसी के सपनों के पंख कतर जाते हैं । फिर भी पंख कतरे जाने के डर से भला कोई सपने संजोना छोड़ दे.. नहीं न । वैसे हम जो सपने देखते हैं उनमें कुछ तो ऎसे होते हैं जिन्हें पूरा करने में हमारा बस चलता है । लेकिन कुछ हमारे बस के बाहर होते हैं ....शायद कुछ ऎसा ही एक सपना है जो केवल मैं ही नहीम आप लोग भी देखते होंगे । जी हां ........काश बादलों के ऊपर अपना घर हो तो सोचो कैसा होगा ? खैर अभी आपने ऎसा अजूबा नहीं सोचा है तो इन तस्वीरों को देखकर जरूर सोचेंगे कि काश ऎसा हो तो कैसा हो.............






                                                                                                  
























3 comments:

विवेक Call me Vish !! said...

khoobsurat.....swagat hai !!!

सतीश सक्सेना said...

बहुत सुंदर ...शुभकामनायें !

हल्ला बोल said...

ब्लॉग जगत में पहली बार एक ऐसा सामुदायिक ब्लॉग जो भारत के स्वाभिमान और हिन्दू स्वाभिमान को संकल्पित है, जो देशभक्त मुसलमानों का सम्मान करता है, पर बाबर और लादेन द्वारा रचित इस्लाम की हिंसा का खुलकर विरोध करता है. साथ ही धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कायरता दिखाने वाले हिन्दुओ का भी विरोध करता है.
इस ब्लॉग पर आने से हिंदुत्व का विरोध करने वाले कट्टर मुसलमान और धर्मनिरपेक्ष { कायर} हिन्दू भी परहेज करे.
समय मिले तो इस ब्लॉग को देखकर अपने विचार अवश्य दे
.
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