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Saturday, May 8, 2010

''जेनेटिक इंजीनियरिंग भविष्य में किसी भी रोग का ईलाज करने में सक्षम होगा'' -- डॉ धनीराम बरुआ



एक हैं डॉ धनीराम बरुआ, मजाकिया , पल में गुस्सेल यानि- पल में माशा, पल में तोला, विवादों से उनका चोली दामन का साथ रहा है. उन्होंने हाल ही में जेनेटिक इंजीनियरिंग पर ५ मोटी - मोटी किताबें लिख डाली हैं. इतनी मोटी की विज्ञान के छात्रो को ही नहीं वरन डॉक्टरों को भी पढ़ने में पसीना आ जाये. 
इस बार उन्होंने दावा किया है कि जेनेटिक मेडिकल साइंस और इंजीनियरिंग भविष्य में किसी भी रोग का ईलाज करने में सक्षम होगा . वह मानते हैं कि आज मेरी बात लोगो के गले नहीं उतर रही है, क्योंकि मेरी बात मानने से करोड़ो - अरबों के मेडिकल व्यवसाय पर असर पड़ेगा. लिहाजा मुझे अपनी बात मनवाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ेगें, लेकिन मैं हार नहीं मानूंगा. उनका कहना है कि मैं विश्व प्रसिद्ध मेडिकल एक्सपर्ट को आमंत्रित करता हूँ कि वह आयें मेरे द्वारा ईलाज किये गये मरीजों से बात करे या जिनका मैं ईलाज कर रहा हूँ उन पर रिसर्च करें .
डॉ बरुआ के अनुसार ,''मैंने ऐसे ऐसे डॉ, जज और पड़े लिखे लोगों का ईलाज किया है, जो हताश हो गये थे , बड़े बड़े डॉ व अस्पतालों ने उम्मीद की किरन छोड़ दी थी ऐसे में वह मेरे पास आये मैंने उनका ईलाज किया हार्ट का. जिन लोगो को मरा हुआ मान लिया गया था उन्हें मेरे ५- ६ जेनेटिक इंजेक्शन ने नया जीवन दिया और वह लोग आज पिछले ४-५ वर्षों से बिना किसी दवा के जिन्दा ही नहीं आम आदमी जैसे स्वस्थ्य है.
डॉ बरुआ का कहना है कि हार्ट कि कैसी भी समस्या को मैं ठीक वैसे ही सही करता हूँ जैसे आम डॉ खांसी, जुकाम को ठीक करते हैं. हार्ट के अलावा बेक पैन, जोड़ों का दर्द, हाई और लो बी पी, शुगर जैसी बीमारियों का आसान ईलाज है मेरे जेनेटिक कैपसूल में .असम में गोहाटी के पास सोनापुर में उनका अस्पताल है और सरल भाषा में कहा जाये तो ऐसे खेत हैं जहाँ सालों साल रिसर्च करने के बाद वह ऐसे प्लांट उगाते हैं जिनसे वह ईलाज कर पाते हैं. डॉ बरुआ के अनुसार उनके पास कैंसर जैसे असाध्य बिमारी का ईलाज भी है लेकिन मेरे पास ज्यादातर मरीज तब आते हैं जब कैंसर की आखिरी स्टेज होती है और सारे डॉ हाथ खड़े कर चुके होते हैं. तब भी मैं चुनौती के तौर पर ऐसे मरीजों का ईलाज करता हूँ और जो मरीज तथाकथित कैंसर विशेषज्ञ के अनुसार ३-६ महीने का मेहमान होता है. मैं उसे अपने ईलाज से ३-६ साल तक जिन्दा रखता हूँ. यदि यही मरीज मेरे पास आखिरी समय से कुछ पहले आ जाये तो मैं कैंसर को भी जड़ से उखाड़ फेंकू.
वैसे मेरा अपना मानना है कि किसी भी तरह की खोज करने वाले को पहले बेवकूफ और मिराकी ही समझा जाता है और ऐसे में डॉ बरुआ को भी पागल समझा जाना उनकी खोज या उपलब्धि को कम नहीं कर सकता .यह बात इसलिए इतने ठोस शब्दों में कही जा रही है कि  मुंबई के एक एम बी बी एस डॉ और जज , जिन्हें हार्ट की समस्या थी और उन्हें तमाम डॉ ने थैंक्यू कह दिया था.की जिंदगी में डॉ बरुआ भगवान् बन कर आये, ऐसा इन दोनों का कहना हैं. अब ऐसा तो नहीं माना जा  नहीं सकता की इन दोनों उच्च शिक्षा प्राप्त डॉ और जज को डॉ बरूआ ने खरीद लिया हो कि भैय्या वही बोलना जो मैं चाहूँ क्योंकि बात करने से इतना तो महसूस हो ही जाता है कि सामने वाला कितना सच बोल रहा है और कितना झूठ .
दोनों के अनुसार हार्ट की समस्या के चलते हमारा उठना बैठना यहाँ तक कि बोलना भी बंद हो गया था. जज के अनुसार, ''डॉ ने कहा कि बाई पास सर्जरी करवानी पड़ेगी, लेंकिन इसके बावजूद जरुरी नहीं कि आप स्थायी तौर पर सही हो जाये. मेरी हालत ऐसी हो गयी थी कि मुझे अपना पेशा छोड़ना पड़ा, क्योंकि न मैं चल सकता था, मेरे हाथों ने काम करना बंद कर दिया था, मैं बोल भी नहीं पाता था, ऐसे हालात में मुझे डॉ बरुआ का पता चला. लिहाजा मरना तो तय था सोचा क्यों न एक चांस ले लूं.जब मैं उनके गोहाटी के पास स्थित अस्पताल में गया तो उन्होंने मुझे ३-४ इंजेक्शन लगाये यह चार साल पहले कि बात है. क्या आप यकीन करेगें कि मैं करीब एक सप्ताह बाद अस्पताल के सामने वाली पहाड़ी पर २-३ किलोमीटर चढ़ गया और तब से अब तक न तो डॉ बरुआ की या अन्य किसी डॉ की कैसी भी दवा मैं खाता हूँ. मेरे पहले के डॉ अब यह मानने को तैयार ही नहीं हैं कि मुझे हार्ट की बिमारी थी.
ऐसे ही एम बी बी एस डॉ का कहना है कि मैं बाई पास करवा चुका था और कुछ महीने ठीक रहने के बाद मुझे हार्ट की समस्या फिर से शुरू हो गयी तब डॉ बरुआ ने गोहाटी स्थित अस्पताल में रख कर मेरा ईलाज किया और आज ४-५ साल के बाद मैं बिल्कुल भला चंगा हूँ.

डॉ बरुआ रेखा के अभिनय को बहुत पसंद करते हैं और सनी देओल के अभिनय को भी,उन्हें जब से पता चला है कि संनी को स्पोंडलाइटिस यानि बैक की प्रोब्लम है तब से डॉ सनी से एक बार मिलना चाहते है उनका कहना है कि मैं सनी को १० दिन मैं बिल्कुल ठीक कर सकता हूँ . अब यदि सनी देओल पढ़ रहे हों तो उन्हें डॉ बरुआ से मिलने में कोई हर्ज नहीं है क्योंकि डॉ कहना है कि ऐसे पॉवर फुल हीरो को पॉवर फुल ही रहना चाहिए .
वैसे डॉ.बरुआ को पुराने हीरो राजकुमार का अभिनय और व्यक्तित्व बहुत पसंद था और नाना पाटेकर के बारें में उनका कहना है कि वह तो बहुत मिराकी लगता है लेकिन अभिनय कमाल का करता है, तो अब राजकुमार और नाना पाटेकर डॉ बरूआ की पसंद हैं तो कुछ कहने की गुंजाइश कहाँ बचती है.

3 comments:

honesty project democracy said...

शशि जी उपयोगी जानकारी आधारित पोस्ट के लिए धन्यवाद / इस बेईमान दुनिया में किसी भी अच्छी चीज का उपयोग भी बुरे के लिए करने लगे लोग , ऐसे में इस थ्योरी का भी इस्तेमाल जनकल्याण और सेवा में कम,निहित स्वार्थ में ज्यादा होगा /

M VERMA said...

आपकी पोस्ट जानकारी से भरी होती है
अच्छा लगता है
डाँ बरूआ के बारे में अच्छी जानकारी दी आपने
धन्यवाद

काजल कुमार Kajal Kumar said...

जेनेटिक इंजीनियरिंग से ईलाज, सुनने में अवधारणा तो अच्छी लगती है पर इसके प्रयोग ख़तरों से पटा पड़ा है.