
तस्वीर में दो अंधे व्यक्ति हैं जो कि इस भीषण गर्मी में प्यास से बेहाल थे । वह अपनी प्यस बुझाने किसी तरह पानी के नल तक तो पहुंच गए लेकिन उनसे नल नही खोला गया । तभी वहां एक बंदर आया , लगता है उससे इनका कष्ट नही देखा गया और इन अंधे लोगों की मदद करने आगे आया । बंदर ने मानव सेवा का धर्म निभाते हुए नल की टूंटी खोल दी जिससे इन लोगों ने पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई । आज इंसान - इंसान के काम नहीम आता जबकि एक जानवर ने मानव सेवा करके मिसाल कायम कर दी ।
यह चित्र हैदराबाद से मोहनजी द्वारा मेरे मेल पर भेजा गया था और मैं इसे आप सबके साथ साझा करके मानव सेवा धर्म को न भूलने की उम्मीद करती हूं ।
7 comments:
अविश्वसनीय है ! अगर यह सच है तो बहुत बढ़िया उदाहरण हमारे लिए !
मानवीय संवेदनाएँ चुकने लगी हैं पर जानवर तो नैसर्गिक रूप से संवेदनशील होते ही है.
वाकई तस्वीरें झूठ नही बोलती. सब कुछ तो कह रही है यह तस्वीर
adbhut kash ye bandar kabhi aadmi na bane...
http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/
मानवता को सीख !
हमारे पूर्वज हैं।
बहुत दुर्लभ दृष्य!!
सन्वेदनाऎं तो अब सिर्फ पशु,पक्षियों के पास ही रह गई हैं...जब कि इन्सान तो इनसे पीछा छुडाने लगा है..
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