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Wednesday, September 9, 2009

अभी बहुत सारे अवार्ड लेने बाकी हैं : ओमपुरी

अभिनेता ओम पुरी ने जब भी किसी भूमिका को अभिनीत किया है तो पूरी तरह से उसमें डूबकर। तभी तो उन्हें अभिनय के लिए दो बार राष्ट्रीय पुरुस्कार, फिल्म फेयर अवार्ड, लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड व पद्मश्री जैसे अनेको सम्मानीय अवार्ड मिलचुके हैं। रिद्धि सिद्धि द्वारा प्रस्तुत फिल्म ''बाबर'' में उन्होंने फिर एक बार दरोगा की भूमिका अभिनीत की है अब तक वह ३० बार पुलिस ऑफिसर की भूमिका कर चुके हैं फिल्म ''बाबर'' में वह दरोगा बने हैं
।पिछले दिनों नॉएडा के मारवाह स्टूडियो में इसी फिल्म के सिलसिले उनसे बातचीत हुई.प्रस्तुत हैं बातचीत के कुछ अंश-------
· ''बाबर'' में एक बार फिर पुलिस के दरोगा बने है क्या कोई ख़ास वजह इसकी?
-ख़ास वजह तो यही है कि मैं फिर से पुलिस वाला बना हूँ फिल्म ''बाबर में, पता नहीं अभी कितनी बार और बनूंगा.
· अर्धसत्य से लेकर अब तक आप अनेको बार पुलिस वाले की भूमिका कर चुके हैं कैसा रहा अब तक का सफ़र?
-फिल्म ''अर्धसत्य'' से शुरू हुआ पुलिस की भूमिका का यह सफ़र बहुत ही अच्छा रहा. मैंने अच्छे व बुरे दोनों ही तरह के पुलिस ऑफिसर की भूमिका की है. ''अर्धसत्य'' में मैं ईमानदार पुलिस ऑफिसर बना था जबकि इस फिल्म ''बाबर'' में भ्रष्ट दरोगा बना हूँ, जो कि अपराधी की मदद करता है उसके साथ बैठ कर चाय पीता है. बाद में उसे अपने रास्ते से हटाने से भी झिझकता नहीं हैं. मजा आया चतुर्वेदी के चरित्र को अभिनीत करके. वास्तव में ऐसे दरोगा होते हैं.
· फिल्म ''बाबर'' की कहानी बताइए?
-यह कहानी है एक ऐसे लड़के बाबर की, जो कि १२ साल की छोटी सी उम्र में हत्या कर देता है और अपराध के इस सफर मे चलते हुए वो माफिया बन जाता है.
· इस फिल्म में आपके साथ मिथुन दा भी है, कैसा रहा उनके साथ काम करके?
-बहुत ही मजा आया शूट पर, कैसे अभिनेता हैं वह आप सभी जानते हैं मुझे यह बताने की जरुरत नहीं हैं. मुझे ''देव'' फिल्म मे बिग बी के साथ भी बहुत मजा आया था. ''मकबूल'' फिल्म में पुलिस वाले की भूमिका को करते समय शूट पर मैंने व नसीर ने बहुत ही मजे किये.
· फिल्म की किसी भूमिका का असर आपकी निजी जिन्दगी पर भी पड़ता है?
- बस ''अर्धसत्य'' के पुलिस ऑफिसर का चरित्र मुझे प्रभावित करता है. बाकि तो जब तक मैं शूट पर रहता हूँ तभी तक उसका प्रभाव रहता है जैसे ही शूट ख़त्म हुआ असर ख़त्म और मैं वापस ओम पुरी.
· ''बाबर'' के निर्देशक आशु त्रिखा के साथ कैसा रहा काम करना?
-आशु ने अच्छी कहानी चुनी है फिल्म की. एक वास्तविक कहानी पर फिल्म बनाना और उसे वास्तविक लोकेशन पर शूट करना कोई आसान काम नहीं हैं. दर्शको को पसंद आएगी ''बाबर'' फिल्म.
· आपकी कौन कौन सी फिल्में आने वाली हैं?
-''लन्दन ड्रीम्स'' ,''रोड टू संगम'', ''वांटेड'' व इस प्यार को क्या नाम दूं'' मेरी आने वाली फिल्में हैं.
· आपको राष्ट्रीय पुरुस्कार, फिल्मफेयर, पदमश्री व लाइफ टाइम अचीवमेंट आदि अनेको अवार्ड मिल चुके हैं अब क्या चाहते है?
-अभी बहुत सारे अवार्ड बचे हैं जैसे जैसे मिलेगें तब मैं उसके में बात करूगां, अभी नहीं.

2 comments:

फ़िरदौस ख़ान said...

बहुत अच्छी पोस्ट है...

दिव्य नर्मदा said...

om puree jaisa kalakar har award se oonch hai.