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Monday, July 8, 2013
Wednesday, July 4, 2012
लोकतंत्र से देश को खतरा : सुरेन्दर शर्मा
आज इस देश में लोकतंत्र को कोई खतरा नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की वजह से देश को खतरा है. जाने माने हास्य कवि सुरेंदर शर्मा ने आज के राजनीतिक हालात और नेताओं पर अपनी जानी पहचानी चुटीली शैली में व्यंग बाण छोड़े। शर्मा पीतमपुरा स्थित गुरू गोविंद सिंह कॉलेज में भिवानी मैत्री परिवार की तरफ से आयोजित मधुप जयंती समारोह के मौके पर हास्य कवि सम्मेलन में त्रोताओं को ना केवल जमकर हंसाया बल्कि सोचने पर भी मजबूर किया। कवि सम्मेलन में डा गोविंद व्यास, कुंवर बैचेन, गजेन्द्र सोलंकी, राजेंद्र कलकल और अनिल अग्रवंशी ने भी अपनी रचनाओं से लोगों का खासा मनोरंजन किया।पंजाब केसरी के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार अश्विनी चोपड़ा इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे. उन्होंने मधुपजी
साहित्य की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए लोगों को इसे गंभीरता से पढने की अपील की. श्री चोपड़ा ने भिवानी
परिवार मैत्री संघ द्वारा किये जा रहे जनहित के कार्यों की भी सराहना की.
भिवानी परिवार मैत्री संघ के संरक्षक सुधाकर गुप्ता के मुताबिक मधुप जयंती समारोह का आयोजन भिवानी के मूल निवासी और हरियाणा के जाने माने कवि महाबीर प्रसाद मधुप की याद में किया जाता है। कार्यक्रम में मधुप के गजल संग्रह कारवां उम्मीद का का विमोचन किया गया. जबकि साहित्य में खास योगदान के लिए हरियाणा साहित्य अकादमी के सचिव माधव कौशिक को मधुप काव्य सम्मान से नवाजा गया। श्री माधव कौशिक और श्री अश्विनी चोपड़ा ने भिवानी परिवार मैत्री संघ को हर संभव मदद देने का वादा किया . दोनों ने ही मधुप जी की याद में शुरू किये गए किसी भी कार्य में पूरा सहयाग करने का भी भरोसा दिलाया. समारोह का आयोजन श्रीमती सरबती देवी गुप्ता के सान्निध्य में किया गया. इस कार्यक्रम में शिक्षाविद और विद्या भारती के महासचिव नरेंद्र जीत सिंह रावल , एस्कॉर्टस अस्पताल के निदेशक डा़ सुमन भंडारी, राष्ट्रीय कवि संगम के अध्यक्ष जगदीश मित्तल, समाजसेवी कुसुमाकर गुप्ता, तुगलकाबाद ट्रेडर्स एसोसिअशन के अध्यक्ष ओपी गोयल, बीजेपी नेता महेंद्र चावला,ठाकुर विक्रम सिंह, निगम पार्षद अरविंद गर्ग लायंस क्लब के गवर्नर सुरेश गुप्ता, अग्रवाल मूवर्स एण्ड पैकर्स के रमेश अग्रवाल,व्यवसायी सुदर्शन जैन , समाजसेवी सतीश गुप्ता, न्यूज एक्प्रैक्स चैनल के दिल्ली एनसीआर प्रमुख अतुल सिंघल समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। बीपीएमएस के महासचिव अरविन्द गर्ग ने उपस्थित लोगों को संस्था के काम काज की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि भिवानी परिवार मैत्री संघ हरियाणा के भिवानी जिले के मूल निवासियों के उन परिवारों का समूह है जो दिल्ली और आस पास के इलाकों में रहते हैं. श्री गर्ग के मुताबिक संघ आजकल अपने सदस्यों को दिल्ली में एक अदद छत मुहैया करवाने के लिए एक आवासीय परियोजना पर काम कर रहा है. इसके अलावा सद्स्यों की एक डायरेक्ट्री के प्रकाशन का काम भी चल रहा है. जबकि अंतर्राष्ट्रीय कवि और भिवानी परिवार मैत्री संघ के अध्यक्ष राजेश चेतन ने खूबसूरत मंच संचालन किया. चेतन ने समारोह को सफल बनाने के लिए अपने कोषाध्यक्ष जगदीश गोयल , कार्यकारिणी सदस्यों प्रमोद शर्मा, दिनेश गुप्ता, सुभाष गर्ग, राजीव गुप्ता, अशोक भारद्वाज, सुशील गनोत्रा, सुरेश अग्रवाल,पवन मोड़ा, अनिल सर्राफ, राजेन्द्र जालान, राजकुमार अग्रवाल और संरक्षक सत्य नारायण गुप्ता का धन्यवाद किया. चेतन ने बताया कि हमारी माटी हमारी विरासत बीपीएमएस का मूल मन्त्र है. इसलिए संस्था समाज की भलाई के काम करती रहेगी.
Friday, March 23, 2012
हिंदू नववर्ष नुबारक हो........
आज 23 मार्च २०१२ से हिन्दू नववर्ष एवं विक्रम शक संवत्सर २०६९का आरंभ हो गया है. हिन्दू नववर्ष के आरंभ के साथ ही नवरात्र भी प्रारंभ हो गए हैं. बसंत ऋतु के आगमन का संकेत मिलने लगता है, और वातावरण खुशनुमा एहसास कराता है. हिन्दू नववर्ष का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है. ब्रह्मा पुराण के अनुसार सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन हुआ था.ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि की रचना प्रारम्भ करने के दिन से ही नव वर्ष का आरम्भ होना माना जाता है .इसी दिन से ही काल गणना का प्रारंभ हुआ था. सतयुग का प्रारंभ भी इसी दिन से माना जाता है.यह दक्षिण भारत में सर्वाधिक प्रचलित है ।
इस बववर्ष से और भी कई अधिक ऎतिहासिक संदर्भ जुडे़ हुए हैं । जैसे - मर्यादा पुरुषोत्तम राम का राज्याभिषेक दिवस , शक्ति की आराधना हेतु नवरातत्र आरम्भ , महर्ष दयानन्द जी द्वारा आर्य समाज की स्थापना , राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डा. केशव बलीराम हेडगेवार जी का जन्म दिवस , देव भगवान झूलेलाल जी का जब्नदिवस , धर्मराज युधिष्ठिर का राजतिलक आदि ।
लेकिन बडे़ दुख का विषय है कि आज नई पीढी़ हिंदू नववर्ष से एकदम अनभिज्ञ है , वह अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक पहली जनवरी को नया साल बडे़ ही जोशों - खरोश के साथ मनाती है मगर हिंदू नववर्ष पर उनका ध्यान ही नहीं रहता है । आज आवश्यकता है तो इस बात की कि हिंदू नववर्ष का प्रचार - प्रसार ज्यादा से ज्यादा किया जाए ताकि नई पीढी़ का ध्यान इस ओर खींचा जा सके । तो आइए जिस तरह हम जोर शोर से अंग्रेजी केलेण्डर के मुताबिक १ जनवरी को नया साल मनाते हैं । उससे कहीं ज्यादा जोश व उमंग के साथ नव संवत्सर 2069 का स्वागत करें ..........
इस बववर्ष से और भी कई अधिक ऎतिहासिक संदर्भ जुडे़ हुए हैं । जैसे - मर्यादा पुरुषोत्तम राम का राज्याभिषेक दिवस , शक्ति की आराधना हेतु नवरातत्र आरम्भ , महर्ष दयानन्द जी द्वारा आर्य समाज की स्थापना , राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डा. केशव बलीराम हेडगेवार जी का जन्म दिवस , देव भगवान झूलेलाल जी का जब्नदिवस , धर्मराज युधिष्ठिर का राजतिलक आदि ।
लेकिन बडे़ दुख का विषय है कि आज नई पीढी़ हिंदू नववर्ष से एकदम अनभिज्ञ है , वह अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक पहली जनवरी को नया साल बडे़ ही जोशों - खरोश के साथ मनाती है मगर हिंदू नववर्ष पर उनका ध्यान ही नहीं रहता है । आज आवश्यकता है तो इस बात की कि हिंदू नववर्ष का प्रचार - प्रसार ज्यादा से ज्यादा किया जाए ताकि नई पीढी़ का ध्यान इस ओर खींचा जा सके । तो आइए जिस तरह हम जोर शोर से अंग्रेजी केलेण्डर के मुताबिक १ जनवरी को नया साल मनाते हैं । उससे कहीं ज्यादा जोश व उमंग के साथ नव संवत्सर 2069 का स्वागत करें ..........
Saturday, March 17, 2012
दो बूंद कमाल की ...
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Wednesday, February 1, 2012
कैंसर जागरूकता कैम्प 5 फरवरी को
कैंसर एक जानलेवा बीमारी है , लेकिन थोडी़ सी जागरूकता से इस बीमारी से बचा जा सकता है । यह कहना है अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रमुख प्रोफेसर जी के रथ का । प्रोफेसर रथ के अनुसार इस बीमारी से कैसे बचा जाए , लोगों को इस बारे में जानकारी का अभाव है इसलिए कैंसर विभाग के डॉक्टर लोगों के बीच जाकर उन्हें जागरूक करना चाहते हैं ।
आने वाली 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस भी मनाया जा रहा है । इसी कडी़ में आगामी 5 फरवरी को महाराजा अग्रसैन भवन , रोहिणी सैक्टर 8 में कैंसर जागरूकता कैम्प का आयोजन किया जा रहा है । कैम्प आयोजन का समय दोपहर दो बजे से पांच बजे है । श्रीमती उषा हेल्पेज एसोसिएशन द्वारा यह कैम्प एम्स और भिवानी परिवार मैत्री संघ के सहयोग से लगाया जा रहा है ।इस कैम्प में लोगों का रजिस्ट्रेशन करने के साथ - साथ जरूरत पड़ने पर उनका प्राथमिकता के आधार पर एम्स में इलाज किया जाएगा । आयोजकों ने लोगों से कहा कहा है कि वे ज्यादा संख्या में पहुंचकर लाभ उठाएं ।
आने वाली 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस भी मनाया जा रहा है । इसी कडी़ में आगामी 5 फरवरी को महाराजा अग्रसैन भवन , रोहिणी सैक्टर 8 में कैंसर जागरूकता कैम्प का आयोजन किया जा रहा है । कैम्प आयोजन का समय दोपहर दो बजे से पांच बजे है । श्रीमती उषा हेल्पेज एसोसिएशन द्वारा यह कैम्प एम्स और भिवानी परिवार मैत्री संघ के सहयोग से लगाया जा रहा है ।इस कैम्प में लोगों का रजिस्ट्रेशन करने के साथ - साथ जरूरत पड़ने पर उनका प्राथमिकता के आधार पर एम्स में इलाज किया जाएगा । आयोजकों ने लोगों से कहा कहा है कि वे ज्यादा संख्या में पहुंचकर लाभ उठाएं ।
Saturday, December 31, 2011
नया साल मुबारक हो .......................
तो दोस्तों .. धीरे - धीरे समय अपनी चाल से आगे बढ़ रहा है और इसीके साथ नया साल 2012 के आने की घडी़ नजदीक आती जा रही है । नये साल के स्वागत के लिय हर कोई अपनी - अपनी तरह से तैयार है । बाजार सज गये हैं , स्कूल बंद हो गये हैं । मॉल्स, पब्स , रेस्तरां , होटल्स आदि का नजारा देखने लायक है । सभी नववर्ष का जश्न मनाने को उत्साहित हैं ।इधर 2011 अंतिम पडा़व पर हम सबसे विदा लेने को तैयार है ।एक साल और हमारी जिंदगी से गुजर जाएगा । अत: जिंदगी के बसंत में एक और बसंत जोड़कर 2011 का यह साल हमें ना जाने कितनी अनगिनत यादें देकर छोड़ जा रहा है । लेकिन यह भी सही है कि ये साल चलते - चलते हमें 2012 के रूप में एक नया साथी देकर जा रहा है , जिसके साथ हमें पूरे 365 दिन हंसते मुस्कुराते बिताने हैं ।
हालांकि ये साल 2011 हर क्षेत्र में काफी उथल - पुथल भरा रहा । कई ऎसी घटनाएं , वारदातें व हलचलें हुईं जिन्हें भुला पाना नामुमकिन है । फिर भी जिंदगी संघर्षों से जूझते रहने का नाम है , यह ध्यान में रखते हुए जो बीत गया सो बीत गया उसे भूल जाएं और जो आने वाला है उसका उत्सव मनाएं । इस जाने वाले साल को बेहतरीन व यादगार विदाई दें तथा पूरी गर्मजोशी से आने वाले साल 2012 का स्वागत करें ।
गौर फरमाईए कुच किसी की और कुछ मेरी कही चंद लाईनों पर ........
सदा दूर रहो गम की परछाईयों से ,
सामना ना हो कभी तन्हाईयों से ,
जो बीत गया उसे बीत जाने दो
मगर सबक लो उन बीती बातों से ,
जो कुछ करने की तमन्ना यूं रखते हो
तो आओ .....
उसे पूरा करने का प्रण लेते हैं ....
एक बार फिर से .....
हर अरमान - हर ख्वाब आपका पूरा हो
यही कामना है दिल की गहराईयों से ..
भले 2011 से ना कुछ मिल पाया है
मगर ....
2012 खुशियों की सौगात लेकर आया है ............
अंत में सभी दोस्तों , परिजनों , परिचितों को नए साल की बहुत - बहुत बधाईयां.......
हालांकि ये साल 2011 हर क्षेत्र में काफी उथल - पुथल भरा रहा । कई ऎसी घटनाएं , वारदातें व हलचलें हुईं जिन्हें भुला पाना नामुमकिन है । फिर भी जिंदगी संघर्षों से जूझते रहने का नाम है , यह ध्यान में रखते हुए जो बीत गया सो बीत गया उसे भूल जाएं और जो आने वाला है उसका उत्सव मनाएं । इस जाने वाले साल को बेहतरीन व यादगार विदाई दें तथा पूरी गर्मजोशी से आने वाले साल 2012 का स्वागत करें ।
गौर फरमाईए कुच किसी की और कुछ मेरी कही चंद लाईनों पर ........
सदा दूर रहो गम की परछाईयों से ,
सामना ना हो कभी तन्हाईयों से ,
जो बीत गया उसे बीत जाने दो
मगर सबक लो उन बीती बातों से ,
जो कुछ करने की तमन्ना यूं रखते हो
तो आओ .....
उसे पूरा करने का प्रण लेते हैं ....
एक बार फिर से .....
हर अरमान - हर ख्वाब आपका पूरा हो
यही कामना है दिल की गहराईयों से ..
भले 2011 से ना कुछ मिल पाया है
मगर ....
2012 खुशियों की सौगात लेकर आया है ............
अंत में सभी दोस्तों , परिजनों , परिचितों को नए साल की बहुत - बहुत बधाईयां.......
Thursday, December 15, 2011
देर आयद - दुरुस्त आयद ...
दिल्ली के उपराज्यपाल तेजेन्द्र खन्ना द्वारा मेयर व एमसीडी नेताओं के
विदेशी टूर को रद्द करने को लेकर जहां एमसीडी में अंदरूनी तौर पर अफरा -
तफरी मच गई है , वहीं उपराज्यपाल का यह निर्णय दिल्ली की जनता नए साल का
तोहफा मान रही है । हालांकि ऎसा निर्णय बहुत पहले ही लिया जाना चाहिए था ,
खैर देर आयद - दुरुस्त आयद यानि जब जागो तभी सबेरा ।
यह सही है कि नेता लोग स्टडी टूर के नाम पर हर वर्ष नए साल के अवसर पर छुट्टियां मनाने विदेशों की सैर पर जाते थे और विदेश से स्टडी के नाम पर मौज - मस्ती की यादें लेकर लौटते थे । इस टूर पर हर साल लाखों का खर्चा आता रहा है , जिसकी भरपाई किसी न किसी बहाने दिल्ली की जनता को ही करनी पड़ती रही है ।
इसे अन्ना प्रभाव कहा जाए या कुछ और , मगर यह सच है कि दिल्ली के उपराज्यपाल को समझ आ गई है कि उन्हें जनता के हित में काम करने के लिए क्या कदम उठाने चाहिये । उन्होंने खर्चों में कटौती के नाम पर सबसे पहले अपने नेताओं के विदेशी टूर पर रोक लगा कर एमसीडी का लाखों का खर्च होने से बचाया है । उधर इस फरमान से आम जनता पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को पड़ने से भी रोका है । संभवतया अब ये लाखों रुपयों की बचत जनसुविधाओं को संवारने के काम में लाई जाएगी और जनता की गाढी़ कमाई जनता के ही काम आ सकेगी ।
राजनीतिक हलकों में उपराज्यपाल का यह फैसला भले ही राजनीति से प्रेरित बताया जा रहा है , लेकिन तेजेन्द्र खन्ना का यह कदम सराहनीय है । उम्मीद की जाती है कि भविष्य में दूसरे नेता भी इससे सीख लेकर जनहित में फैसले लेते रहेंगे और तमाम सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचारी , हरामखोरी व फिजूलखर्ची पर रोक लगाएंगे .....
यह सही है कि नेता लोग स्टडी टूर के नाम पर हर वर्ष नए साल के अवसर पर छुट्टियां मनाने विदेशों की सैर पर जाते थे और विदेश से स्टडी के नाम पर मौज - मस्ती की यादें लेकर लौटते थे । इस टूर पर हर साल लाखों का खर्चा आता रहा है , जिसकी भरपाई किसी न किसी बहाने दिल्ली की जनता को ही करनी पड़ती रही है ।
इसे अन्ना प्रभाव कहा जाए या कुछ और , मगर यह सच है कि दिल्ली के उपराज्यपाल को समझ आ गई है कि उन्हें जनता के हित में काम करने के लिए क्या कदम उठाने चाहिये । उन्होंने खर्चों में कटौती के नाम पर सबसे पहले अपने नेताओं के विदेशी टूर पर रोक लगा कर एमसीडी का लाखों का खर्च होने से बचाया है । उधर इस फरमान से आम जनता पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को पड़ने से भी रोका है । संभवतया अब ये लाखों रुपयों की बचत जनसुविधाओं को संवारने के काम में लाई जाएगी और जनता की गाढी़ कमाई जनता के ही काम आ सकेगी ।
राजनीतिक हलकों में उपराज्यपाल का यह फैसला भले ही राजनीति से प्रेरित बताया जा रहा है , लेकिन तेजेन्द्र खन्ना का यह कदम सराहनीय है । उम्मीद की जाती है कि भविष्य में दूसरे नेता भी इससे सीख लेकर जनहित में फैसले लेते रहेंगे और तमाम सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचारी , हरामखोरी व फिजूलखर्ची पर रोक लगाएंगे .....
Sunday, December 4, 2011
हर फिक्र को धूंए में उडा़ता चला गया……….
देवानंद ने 1946 में ”हम एक हैं” से फ़िल्मी दुनिया में क़दम रखा था । इसके बाद उन्हें कई फ़िल्में मिलीं और एक वर्ष बाद जिद्दी के आने तक वे बड़े अभिनेता के रुप में स्थापित हो गए थे.
देवानंद ने कई बेहतरीन फ़िल्में की और अपने अभिनय का लोहा मनवाया। पेइंग गेस्ट, बाज़ी, ज्वेल थीफ, गाइड, सीआईडी, जॉनी मेरा नाम, अमीर गरीब, हरे रामा हरे कृष्णा और देस परदेस जैसी उन्होंने कई फिल्में दीं । देवानंद को २००१ में पद्मभूषण और २००२ में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। उम्र के इस पड़ाव पर भी वे फिल्मों में सक्रिय थे और कुछ फिल्मों का निर्देशन और निर्माण कर रहे थे।
यूं तो देव साहब की फिल्म के कई गाने हिट रहे जो आज भी कानों को सुकून पहुंचाने हैं ।लेकिन आज मुझे उनका ये गीत बहुत याद आ रहा है — मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया …हर फिक्र को धूंए में उडा़ता चला गया……….
Friday, December 2, 2011
दुर्घटनाओं से सबक लें ....
आए दिन होने वाले हादसे , दुर्घटनाएं व वारदातों की खबरें अखबारों की सुर्खियों में होती हैं, जिन्हें देख - पढ़कर एक बार तो दिल बुरी तरह दहल जाता है । लेकिन हम उन दुर्घटनाओं के कारणों को खोजने की बजाए उसका दोष एकदूसरे पर मढ़ देते हैं और लगभग दो - एक दिन में भूल जाते हैं कि हमारे आसपास कुछ घटा था । समझ से परे है कि हम बार - बार होने वाली घटनाओं से सबक लेकर क्यों सचेत नहीं होते ? कई दफा तो ऎसा महसूस होता है कि हम जानते - बूझते दुर्घटनाओं को न्यौता देते हैं ।
आज अखबारों की सुर्खियों में आई दो नौनिहालों की मौत [ वो भी मोबाइल पर ईयरफोन लगाकर गाना सुनते हुए रेलवे ट्रेक पार करते समय ] की खबर ने दिल दहला दिया और एक बार फिर सोचने को मजबूर कर दिया है कि ऎसी घटनाओं की पुनरावृत्ति में लापरवाही क्यों ? जबकि हमारे थोडा़ सा सचेत होने व सख्त रवैया अपनाने से ऎसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है ।
गाज़ियाबाद के देहरादून पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले दोनों छात्र...बारहवीं का रोहित और नौवीं का कुलदीप थे , जो कि बमुश्किल ही पता चल पाया । दो घरों के चिराग बुझने से उनके घर - परिवारीजन बेहाल हैं । लेकिन सभी को हैरानी इस बात की हो रही है कि गाजियाबाद के देहरादून स्कूल में पढ़ने वाले ये छात्र रेलवे ट्रेक पर क्या कर रहे थे ? उस समय तो उन्हें स्कूल में होना चाहिए था ?जी हां जब ये सवाल उठा तो स्कूल की प्रधानाचार्या जी ने बताया कि वे तीन दिन से स्कूल ही नहीं आ रहे हैं ।स्कूल में जो मोबाइल नंबर दे रखे थे वे गलत थे ।
मेरा मानना है कि बच्चों को बिगाड़ने में माँ बाप कहीं अधिक कसूरवार हैं जो स्कूली बच्चों को ,या कहें कि समय से पहले जिसकी बच्चों को जरूरत ही नहीं है , मोबाइल , बाइक , लेपटॉप आदि लेकर दे तो देते हैं मगर उनके इस्तेमाल के लिए कोई नियम - कानून नहीं बनाते । जबकि स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों के माता - पिता को बार - बार चेताया जाता है कि वे बच्चों को मोबाइल , ईयरफोन व बाइक न दें लेकिन मां - बाप इस ओर ध्यान ही नहीं देते । स्कूली बच्चों को तेजगति से बाइक - स्कूटर चलाते हुए साथ ही मोबाइल पर गप्पें लडा़ते हुए अकसर देखा जाता है जो कि दुखदायी और निंदनीय है । बच्चों की ये हरकतें ही वारदातों को अंजाम देती हैं ।
बहरहाल यह घटना अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई है जिनपर हर व्यक्ति , माता - पिता व स्कूल प्रबंधन को सोचना होगा और दोष एकदूसरे पर डालने की बजाए घटना के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हुए कडे़ कदम उठाने होंगे ।
आज अखबारों की सुर्खियों में आई दो नौनिहालों की मौत [ वो भी मोबाइल पर ईयरफोन लगाकर गाना सुनते हुए रेलवे ट्रेक पार करते समय ] की खबर ने दिल दहला दिया और एक बार फिर सोचने को मजबूर कर दिया है कि ऎसी घटनाओं की पुनरावृत्ति में लापरवाही क्यों ? जबकि हमारे थोडा़ सा सचेत होने व सख्त रवैया अपनाने से ऎसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है ।
गाज़ियाबाद के देहरादून पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले दोनों छात्र...बारहवीं का रोहित और नौवीं का कुलदीप थे , जो कि बमुश्किल ही पता चल पाया । दो घरों के चिराग बुझने से उनके घर - परिवारीजन बेहाल हैं । लेकिन सभी को हैरानी इस बात की हो रही है कि गाजियाबाद के देहरादून स्कूल में पढ़ने वाले ये छात्र रेलवे ट्रेक पर क्या कर रहे थे ? उस समय तो उन्हें स्कूल में होना चाहिए था ?जी हां जब ये सवाल उठा तो स्कूल की प्रधानाचार्या जी ने बताया कि वे तीन दिन से स्कूल ही नहीं आ रहे हैं ।स्कूल में जो मोबाइल नंबर दे रखे थे वे गलत थे ।
मेरा मानना है कि बच्चों को बिगाड़ने में माँ बाप कहीं अधिक कसूरवार हैं जो स्कूली बच्चों को ,या कहें कि समय से पहले जिसकी बच्चों को जरूरत ही नहीं है , मोबाइल , बाइक , लेपटॉप आदि लेकर दे तो देते हैं मगर उनके इस्तेमाल के लिए कोई नियम - कानून नहीं बनाते । जबकि स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों के माता - पिता को बार - बार चेताया जाता है कि वे बच्चों को मोबाइल , ईयरफोन व बाइक न दें लेकिन मां - बाप इस ओर ध्यान ही नहीं देते । स्कूली बच्चों को तेजगति से बाइक - स्कूटर चलाते हुए साथ ही मोबाइल पर गप्पें लडा़ते हुए अकसर देखा जाता है जो कि दुखदायी और निंदनीय है । बच्चों की ये हरकतें ही वारदातों को अंजाम देती हैं ।
बहरहाल यह घटना अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई है जिनपर हर व्यक्ति , माता - पिता व स्कूल प्रबंधन को सोचना होगा और दोष एकदूसरे पर डालने की बजाए घटना के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हुए कडे़ कदम उठाने होंगे ।
Thursday, December 1, 2011
आजकल बिगबॉस के घर में जो कुछ भी चल रहा है वह सब जानते हैं ,यह घर कम लडा़ई का मैदान ज्यादा लग रहा है । खैर घर के सदस्यों का जो भी हाल हो मगर बॉलीवुड के लिए ये घर पब्लिसिटी का अच्छा मैदान बन गया है । नई - नई फिल्मों को हिट करने के लिए इसे आम जनता के घर में घुसकर अपनी पैंठ बनाने का अच्छा माध्यम बना लिया गया है । फिल्म के हीरो - हीरोइन व अन्य कलाकार बिगबॉस के घर में आते हैं और बिगबॉस के घर के सदस्यों के साथ - साथ आम जनता तक अपना पैगाम पहुंचाते हैं कि उनकी फिल्म को जरूर- जरूर देखें । इस दौरान जनता को लुभाने के लिए फिल्म के प्रोमो ही नहीं दिखाए जाते बल्कि फिल्म के एकाध गाने की लाइनों पर खूब ठुमके लगाए जाते हैं ।
लगता है बॉलीवुड में किया जा रहा पब्लिसिटी का यह प्रयोग खासा सफल माना जा रहा है , शायद इसी का नतीजा है कि अब आने वाली हर फिल्म के बारे में लगभग सभी सीरियलों में बत्ताया जा रहा है तथा आम जनता से फिल्म देखने की गुजारिश भी की जा रही है ।
लगता है बॉलीवुड में किया जा रहा पब्लिसिटी का यह प्रयोग खासा सफल माना जा रहा है , शायद इसी का नतीजा है कि अब आने वाली हर फिल्म के बारे में लगभग सभी सीरियलों में बत्ताया जा रहा है तथा आम जनता से फिल्म देखने की गुजारिश भी की जा रही है ।
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