Followers

Monday, May 10, 2010

गजलों और गीतों सजा एलबम ''मेरी दीवानगी''

शायद ही आज कोई ऎसा व्यक्ति हो जो संगीत प्रेमी न हो । संगीत ही एक ऎसी अचूक दवा है जिसे सुनकर इंसान अपने दुख - दर्द सब भूल बैठता है । और तरोताजा हो जाता है । आज मैं अपनी पोस्ट के माध्यम से आप सबको हाल ही में बाजार में आई गजलों व गीतों से सजी एक एलबम की जानकारी दे रही हूं ।
संगीत --- इरोज म्यूजिक                                                         सी डी मूल्य - १४९ रुपये
पिछले दिनों इरोज म्यूजिक ने ''मेरी दीवानगी'' शीर्षक से गजलों व गीतों का एक एलबम रिलीज़ किया है. इस एलबम में ९ गीत हैं जिन्हें गाया है गायक सुमित टप्पू ने. भजन सम्राट अनूप जलोटा के शिष्य सुमित के गाये गीतों को लिखा है शकील आज़मी, असीर बुरहानपुरी व मनोज मुन्तशिर ने व दिल को छू लेने वाली धुनें बनायीं हैं संगीतकार दीपक पंडित ने. सुमित टप्पू के संगीत का सफ़र फिजी से शुरू होकर ऑस्ट्रेलिया होता हुआ मुंबई पंहुचा और यहाँ आकर उनका यह एक सपना पूरा हुआ इरोज म्यूजिक के माध्यम से.


एलबम के पहला गीत है ''दिल लगता नहीं कहीं तेरे बिन'' अच्छा है सुनने में. फिर इसके बाद शीर्षक गीत ''मेरी दीवानगी'' , ''प्यार हो जाने दो'', ''मेरे साथ न चल'', '' सपनो में खो जाये'', ''एक तेरा साथ है'', ''मुझसे तू दूर'' ,''रोज़ कहाँ'' और सबसे आखिरी में है गीत ''मेरी दीवानगी'' डांस वर्जन में.
एलबम के सभी गीत अच्छें हैं और उस पर गायक सुमित की आवाज में भी एक मिठास है जो कि सुनने वालों को निश्चित रूप से अपनी ओर खींचेगी. गीत -- संगीत का अच्छा सामंजस्य है ''मेरी दीवानगी” के गीतों में.

Saturday, May 8, 2010

''जेनेटिक इंजीनियरिंग भविष्य में किसी भी रोग का ईलाज करने में सक्षम होगा'' -- डॉ धनीराम बरुआ



एक हैं डॉ धनीराम बरुआ, मजाकिया , पल में गुस्सेल यानि- पल में माशा, पल में तोला, विवादों से उनका चोली दामन का साथ रहा है. उन्होंने हाल ही में जेनेटिक इंजीनियरिंग पर ५ मोटी - मोटी किताबें लिख डाली हैं. इतनी मोटी की विज्ञान के छात्रो को ही नहीं वरन डॉक्टरों को भी पढ़ने में पसीना आ जाये. 
इस बार उन्होंने दावा किया है कि जेनेटिक मेडिकल साइंस और इंजीनियरिंग भविष्य में किसी भी रोग का ईलाज करने में सक्षम होगा . वह मानते हैं कि आज मेरी बात लोगो के गले नहीं उतर रही है, क्योंकि मेरी बात मानने से करोड़ो - अरबों के मेडिकल व्यवसाय पर असर पड़ेगा. लिहाजा मुझे अपनी बात मनवाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ेगें, लेकिन मैं हार नहीं मानूंगा. उनका कहना है कि मैं विश्व प्रसिद्ध मेडिकल एक्सपर्ट को आमंत्रित करता हूँ कि वह आयें मेरे द्वारा ईलाज किये गये मरीजों से बात करे या जिनका मैं ईलाज कर रहा हूँ उन पर रिसर्च करें .
डॉ बरुआ के अनुसार ,''मैंने ऐसे ऐसे डॉ, जज और पड़े लिखे लोगों का ईलाज किया है, जो हताश हो गये थे , बड़े बड़े डॉ व अस्पतालों ने उम्मीद की किरन छोड़ दी थी ऐसे में वह मेरे पास आये मैंने उनका ईलाज किया हार्ट का. जिन लोगो को मरा हुआ मान लिया गया था उन्हें मेरे ५- ६ जेनेटिक इंजेक्शन ने नया जीवन दिया और वह लोग आज पिछले ४-५ वर्षों से बिना किसी दवा के जिन्दा ही नहीं आम आदमी जैसे स्वस्थ्य है.
डॉ बरुआ का कहना है कि हार्ट कि कैसी भी समस्या को मैं ठीक वैसे ही सही करता हूँ जैसे आम डॉ खांसी, जुकाम को ठीक करते हैं. हार्ट के अलावा बेक पैन, जोड़ों का दर्द, हाई और लो बी पी, शुगर जैसी बीमारियों का आसान ईलाज है मेरे जेनेटिक कैपसूल में .असम में गोहाटी के पास सोनापुर में उनका अस्पताल है और सरल भाषा में कहा जाये तो ऐसे खेत हैं जहाँ सालों साल रिसर्च करने के बाद वह ऐसे प्लांट उगाते हैं जिनसे वह ईलाज कर पाते हैं. डॉ बरुआ के अनुसार उनके पास कैंसर जैसे असाध्य बिमारी का ईलाज भी है लेकिन मेरे पास ज्यादातर मरीज तब आते हैं जब कैंसर की आखिरी स्टेज होती है और सारे डॉ हाथ खड़े कर चुके होते हैं. तब भी मैं चुनौती के तौर पर ऐसे मरीजों का ईलाज करता हूँ और जो मरीज तथाकथित कैंसर विशेषज्ञ के अनुसार ३-६ महीने का मेहमान होता है. मैं उसे अपने ईलाज से ३-६ साल तक जिन्दा रखता हूँ. यदि यही मरीज मेरे पास आखिरी समय से कुछ पहले आ जाये तो मैं कैंसर को भी जड़ से उखाड़ फेंकू.
वैसे मेरा अपना मानना है कि किसी भी तरह की खोज करने वाले को पहले बेवकूफ और मिराकी ही समझा जाता है और ऐसे में डॉ बरुआ को भी पागल समझा जाना उनकी खोज या उपलब्धि को कम नहीं कर सकता .यह बात इसलिए इतने ठोस शब्दों में कही जा रही है कि  मुंबई के एक एम बी बी एस डॉ और जज , जिन्हें हार्ट की समस्या थी और उन्हें तमाम डॉ ने थैंक्यू कह दिया था.की जिंदगी में डॉ बरुआ भगवान् बन कर आये, ऐसा इन दोनों का कहना हैं. अब ऐसा तो नहीं माना जा  नहीं सकता की इन दोनों उच्च शिक्षा प्राप्त डॉ और जज को डॉ बरूआ ने खरीद लिया हो कि भैय्या वही बोलना जो मैं चाहूँ क्योंकि बात करने से इतना तो महसूस हो ही जाता है कि सामने वाला कितना सच बोल रहा है और कितना झूठ .
दोनों के अनुसार हार्ट की समस्या के चलते हमारा उठना बैठना यहाँ तक कि बोलना भी बंद हो गया था. जज के अनुसार, ''डॉ ने कहा कि बाई पास सर्जरी करवानी पड़ेगी, लेंकिन इसके बावजूद जरुरी नहीं कि आप स्थायी तौर पर सही हो जाये. मेरी हालत ऐसी हो गयी थी कि मुझे अपना पेशा छोड़ना पड़ा, क्योंकि न मैं चल सकता था, मेरे हाथों ने काम करना बंद कर दिया था, मैं बोल भी नहीं पाता था, ऐसे हालात में मुझे डॉ बरुआ का पता चला. लिहाजा मरना तो तय था सोचा क्यों न एक चांस ले लूं.जब मैं उनके गोहाटी के पास स्थित अस्पताल में गया तो उन्होंने मुझे ३-४ इंजेक्शन लगाये यह चार साल पहले कि बात है. क्या आप यकीन करेगें कि मैं करीब एक सप्ताह बाद अस्पताल के सामने वाली पहाड़ी पर २-३ किलोमीटर चढ़ गया और तब से अब तक न तो डॉ बरुआ की या अन्य किसी डॉ की कैसी भी दवा मैं खाता हूँ. मेरे पहले के डॉ अब यह मानने को तैयार ही नहीं हैं कि मुझे हार्ट की बिमारी थी.
ऐसे ही एम बी बी एस डॉ का कहना है कि मैं बाई पास करवा चुका था और कुछ महीने ठीक रहने के बाद मुझे हार्ट की समस्या फिर से शुरू हो गयी तब डॉ बरुआ ने गोहाटी स्थित अस्पताल में रख कर मेरा ईलाज किया और आज ४-५ साल के बाद मैं बिल्कुल भला चंगा हूँ.

डॉ बरुआ रेखा के अभिनय को बहुत पसंद करते हैं और सनी देओल के अभिनय को भी,उन्हें जब से पता चला है कि संनी को स्पोंडलाइटिस यानि बैक की प्रोब्लम है तब से डॉ सनी से एक बार मिलना चाहते है उनका कहना है कि मैं सनी को १० दिन मैं बिल्कुल ठीक कर सकता हूँ . अब यदि सनी देओल पढ़ रहे हों तो उन्हें डॉ बरुआ से मिलने में कोई हर्ज नहीं है क्योंकि डॉ कहना है कि ऐसे पॉवर फुल हीरो को पॉवर फुल ही रहना चाहिए .
वैसे डॉ.बरुआ को पुराने हीरो राजकुमार का अभिनय और व्यक्तित्व बहुत पसंद था और नाना पाटेकर के बारें में उनका कहना है कि वह तो बहुत मिराकी लगता है लेकिन अभिनय कमाल का करता है, तो अब राजकुमार और नाना पाटेकर डॉ बरूआ की पसंद हैं तो कुछ कहने की गुंजाइश कहाँ बचती है.

Saturday, May 1, 2010

योद्धाओं का महासंग्राम ८ मई को गुडगांव में



भारत में पहली बार योद्धाओं का महासंग्राम विश्व हेविटेट रेसलिंग चैम्पियनशिप २०१० का आयोजन आग्ग्मी ८ मई को गुडगांव में किया जा रहा है । इस आयोजन में ग्रेट खली मुख्य अतिथि होंगे । जबकि कलर्स पर प्रसारित ’ दे दना दन ” के विजेता महाबली संग्राम सिंह ,संजीत सिंह का मुकाबला जैक टैक, सेडो पाजी के साथ विदेशों से आ रहे प्रोफेशनल रेसलरों के साथ होगा ।ये मुकाबला नॉक आउट तथा ड्ब्ल्यू डब्ल्यू ई के कायदा कनून के आधार पर होगा । प्रतियोगिता के रैफरी श्री कुंबन होंगे । प्रतियोगिता को और अधिक मनोरंजक बनाने के लिए फैशन शो का भी आयोजन किया जा रहा है , जिसे मशहूर फैशन डिजायनर संजना जॉन संचालित करेंगी । विदित हो कि प्प्रतियोगिता में भाग ले रहे प्रतियोगियों की ड्रेस भी संजना जॉन ने डिजायन की है ।
उल्लेखनीय है कि भारत में पहली बार इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है । आयोजक डी. एस. बब्बर की माने तो इस प्रतियोगिता की सफलता के बाद देश के अन्य शहरों में भी यह प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी । उनका कहना है कि वे रेसलिंग को युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाना चाहते हैं । साथ ही रेसलिंग से एकत्रित होने वाले पैसे को वह जन कल्याण के कामों में लगाना चाहते हैं ।फिलहाल इस आयोजन से आने वाले पैसे का एक हिस्सा कैंसर पीडित ब्च्चों के इलाज पर , बेटी बचाओ अभियान पर तथा यमुना सफाई अभियान पर खर्च किया जाएगा ।

Thursday, April 29, 2010

टेंशन लेने का नहीं जी , देने का .......

Friday, April 23, 2010

विदेशी धरा पर मचेगी कुमार के काव्य की धूम


”कोई दीवाना कहता है ” से प्रसिद्धि पा चुके डॉ. [ कवि ] कुमार विश्वास अब अगले माह अपने काव्य पाठ से विदेशी धरती को गुंजायमान करेंगे । कुमार 29  अप्रैल से 30  मई तक यूएसए तथा कनाडा के दौरे पर रहेंगे । जहां वे अपने तय कार्यक्रम के तहत अलग - अलग जगहों पर काव्य पाठ करेंगे ।
कार्यक्रम के अनुसार न्यू जर्सी में आयोजित हिन्दी महोत्सव में एक व दो मई , बुफ़ैलो में सात मई , कनाडा [ मोन्ट्रियल व टोरंटो ] में 8-9 मई , वाशिंगटन डीसी में 15  मई , अटलांटा में 16  मई , सेन फ्रांसिस्को में 22 मई , लॉस एंजिलिस में 23 मई , कनैक्टिकट में 29 मई को विदेशी श्रोता कुमार के काव्य पाठ का भरपूर लुत्फ उठाएंगे ।

Wednesday, April 21, 2010

कल 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस

कल 22 अप्रैल को पूरे विश्व भर में विश्व अर्थ दिवस मनाया जाएगा । इस अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन द्वारा बच्चों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है । पेंटिंग प्रतियोगिता में दिल्ली - एन सी आर के सरकारी व गैरसरकारी स्कूलों के लाखों बच्चे भाग ले रहे हैं ।
इसके लिए बच्चों को ”माई क्लीन दिल्ली ड्रीम दिल्ली ” थीम दी गई है जिसके तहत बच्चे क्या सोचते हैं और क्या चाहते हैं ऎसी अपनी सोच को कागज पर उकेरेंगे ।
अभियान से जुडी रश्मि पालीवाल कहती हैं कि आज बच्चे काफी स्मार्ट हो गए हैं हम बडे जो नहीं सोच सकते वह बच्चे कर दिखाते हैं । बच्चों की सोच नायाब है । इसीलिए इस अभियान से बच्चों को जोडा गया है ।
उल्लेखनीय है कि पिछ्ले 27  मार्च को वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड द्वारा अर्थ ऑवर मनाया गया था , जिसके तहत विश्व के कई देशों ने इसमे भाग लेकर शाम को 8.30 से 9.30 तक एक घंटा बिजली बंद रखी थी । उस एक घंटे में विश्व भर के प्रसिद्ध लेंडमार्क व मोन्यूमेंट अंधेरे में डूब गए थे देखिए तस्वीर -------

Sunday, April 18, 2010

तस्वीर झूठ नही बोलती : एक बंदर की मानव सेवा








तस्वीर में दो अंधे व्यक्ति हैं जो कि इस भीषण गर्मी में प्यास से बेहाल थे । वह अपनी प्यस बुझाने किसी तरह पानी के नल तक तो पहुंच गए लेकिन उनसे नल नही खोला गया । तभी वहां एक बंदर आया , लगता है उससे इनका कष्ट नही देखा गया और इन अंधे लोगों की मदद करने आगे आया । बंदर ने मानव सेवा का धर्म निभाते हुए नल की टूंटी खोल दी जिससे इन लोगों ने पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई । आज इंसान - इंसान के काम नहीम आता जबकि एक जानवर ने मानव सेवा करके मिसाल कायम कर दी ।
यह चित्र हैदराबाद से मोहनजी द्वारा मेरे मेल पर भेजा गया था और मैं इसे आप सबके साथ साझा करके मानव सेवा धर्म को न भूलने की उम्मीद करती हूं ।


Thursday, April 15, 2010

छात्रों के एक समूह नेअपने विश्वविद्यालय का रजत जयंती वर्ष एक लंबा पत्र लिखकर और विश्व रिकार्ड स्थापित करके मनाया । गुजरात विश्वविद्यालय के ब्रह्मकुमारीज युवा विंग के छात्रों ने विश्वविद्यालय का सिल्वर जुबली वर्ष तथा अहमदाबाद शहर की स्थापना के छह सौ साल बाद विश्वविद्यालय का हीरक जयंती वर्ष बडे ही अनूठे ढंग से मनाया । इस अवसर पर उन्होंने एक ऎसा ईवेंट आयोजित किया जहां लोग अपने भगवान को खुद पत्र लिख सकें ।
 बडे आश्चर्य की बात रही कि इस ईवेंट में लोगों ने बढचढ कर हिस्सा लिया तथा मात्र तीन घंटे में लगभग  2800 लोगों ने अपने जीवन के लिए खुश आभार की अपनी भावनाओं को  लिखा  और यह भी पूछा कि उन्हें आतंकवाद , गरीबी , भ्रष्टाचार और अन्य बुराइयों से कब छुटकारा मिल पाएगा । यह  पत्र  2,841 फुट लंबा जाकर समाप्त हुआ ।
प्रतिभागियों ने इस अवसर पर अपने जीवन में सबकुछ मिलने के लिए  भगवान का शुक्र अदा करते हुए आभार प्रकट किया ।कार्यक्रम की सफलता पर  आयोजकों का कहना है कि इससे यह सीख मिलती है कि आज कौन है जो भगवान को पत्र लिखना नहीम चाहता ।
खुशी की बात तो यह रही कि पिछले रिकार्ड के तहत पत्र  2,000 रोमानियाई  देशवासियों ने सांता क्लॉस के लिए   1358 फुट विश्व का सबसे लंबा पत्र लिखकर विश्व रिकार्ड स्थापित किया  था ।अब यह रिकार्ड गुजरात के लोगों ने अपने नाम कर लिया है ।

Tuesday, April 13, 2010

बैसाखी : एक फसली पर्व

शरद ॠतु के समाप्त होते ही प्रकृति अपना रंग बदलती है । फूल खिलते हैं , पेडों से महक आने लगती है , आम की कोपलें फूटती है । मैदानी भागों में जहां तक नजर डालो , गेहूं की फसल की चादर बिछी दिखाई देती है । धीमी - धीमी हवा के झोंके से जब गेहूं की बालियों की सरसराहट  किसानों के कानों तक पहुंचती है तो उसका मन खुशी से झूम उठता है । यही वह समय होता है जबकि किसानों की छह महीनों की मेहनत रंग लाती है । बैसाखी के दिन किसान गेहूं की फसल की कटाई करना शुभ मानते हैं
अप्रैल माह की 13 - 14  तारीख को मनाया जाने वाला बैसाखी का त्यौहार पूरे देश में मनाया जाता है । यह धार्मिक त्यौहार न होकर एक फसली त्यौहार है । जो कि मुख्यत: रबी की फसलें पकने की खुशी में मनाया जाता है । यूं तो यह पर्व सारे देश में मनाया जाता है लेकिन पंजाब की बैसाखी का अलगअंदाजहै।इसदिन किसान                                                                            फोटो - गूगल से साभार
अपनी फसल को हांसिए से काटना शुभ मानते हैं और फसल की कटाई किसान के जीवन का सबसे बडा पर्व है । यही वजह है कि कृषि प्रधान पंजाब के लिए इस पर्व का बडा ही महत्व है । फसल कटाई का शुभारम्भ करने के बाद किसान नये - नये वस्त्र पहनकर नाचते - गाते हैं और भांगडा करते हैं । महिलाएं गिद्दा करके अपनी खुशी जाहिर करती हैं । श्रद्धालु नदियों - सरोवरों में स्नान करते हैं । हिंदू संस्कृति में नए साल का शुभारम्भ मार्च - अप्रैल माह अर्थात हिंदू तिथि के अनुसार चैत माह से होता है । हिंदू कैलेंडर के मुताबिक 16 मार्च से नव संवतसर 2067  शुरू हो गया है । अत: चैत माह की 24  तारीख को वैसाखी का त्यौहार मनाया जाता है । जबकि यह त्यौहार अंग्रेजी तिथि के अनुसार अप्रैल माह की 13 - 14  तारीख को पडता है । बताते हैं कि 36  वर्ष बाद यह दूसरी तिथियों में पडता है । यह सूर्य गणना का भी पर्व है ।
पंजाब के अतिरिक्त उत्तरी भारत में गढमुक्तेश्वर व हरिद्वारादि स्थानों पर गंगा तट पर वैसाखी के मेले लगते हैं । बैसखी के दिन ही भागीरथ गंगा को पृथ्वी पर ब्लाने में सफल हुए थे । प्राचीन समय से रावी के तट पर बैसाखी का मेला लगता आ रहा है । बौद्ध धर्म का भी बैसाखी से संबंध है । बैसाखी के दिन ही आज से लगभग  200o  वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी । तथा इसी दिन बौद्ध संघ स्थापित हुआ था ।
आर्य समाजियों में बैसाखी का महत्व इसलिए है क्योंकि स्वामी दयानन्द सरस्वती ने सर्वप्रथम इस दिन ही आर्य समाज की स्थापना की थी । बंगाली एवं कश्मीरी तो नववर्ष का शुभारम्भ बैसखी के दिन से ही मानते हैं ।
इस साल हरिद्वार में कुंभ होने के कारण कल 14  तारीख को बैसाखी पर्व के दिन भक्तजनों कि भारी भीड रहेगी । वैसे भी 15 तरीख अमावस्या को कुम्भ का आखिरी स्नान है इससे भी वहां भीड की बेहद संभावना है ।
इधर कल चौदह तारीख को बाबा भीमराव अंबेडकर जी का जन्मदिन होने के कारण छुट्टी का दिन होने से भी आसपास के क्षेत्रों से लोग हरिद्वार गंगा में डुबकी लगाकर कुंभ स्नान कर पुण्य कमाएंगे ही साथ ही बैसाखी पर्व  को भी एंजाय करेंगे ।



Friday, April 9, 2010

चले थे हीरो बनने ,बन गए संगीतकार : खैय्यामजी


महान संगीतकार खैय्याम का पूरा नाम मोहम्मद ज़हूर खैय्याम है उन्होंने एक से बढ़ कर फ़िल्मी गीतों को मधुर धुनों से सजाया है, लेकिन एक समय था जब वो फिल्मों में अभिनय करना चाहते थे हीरो बनना चाहते न कि संगीतकार. उस जमाने में हीरो बनने के लिए नायक का संगीत जानना भी बहुत ही जरुरी होता था सो वो पंहुच गये लाहौर, मशहूर संगीतकार बाबा चिश्ती के पास, तो लाहौर जाने से खैय्याम हीरो के बजाय संगीतकार बन गये. १९५३ में उन्होंने फ़िल्म ''फुटपाथ'' में संगीत दिया, इस फ़िल्म का गीत ''शामें गम की कसम'' जिसे गाया था गायक तलत महमूद ने, यह गीत सुपर हिट हुआ था, तो इस तरह शुरू हुआ एक महान संगीतकार का संगीतमय सफ़र.
पिछले दिनों संगीत कंपनी सारेगामा द्वारा रिलीज़ की गयी ''परिचय'' सीरिज के अवसर पर खैय्याम साहब से मुलाकात हुई और उन्होंने हमें बहुत सारी अपनी पुरानी यादों से परिचित कराया. उन्होंने ''परिचय'' शीर्षक से रिलीज़ हुई ८ एम पी ३ सीरिज के बारें में कहा कि,'' बहुत ही लाजवाब नाम रखा है सारेगामा ने, सारेगामा के पास तो संगीत का खजाना है. परिचय में शामिल सभी गीत सदा बहार हैं, ये सभी गीत आज भी हिट हैं और हमेशा ही रहेगें.''
खैय्याम साहब के इस एम पी ३ में उनके द्वारा संगीत बद्ध किये गये ४० गीत हैं, जिनमें ''अकेले में वो घबराते तो होंगे'', ''शामे गम की कसम'', ''बहारों मेरा जीवन भी सवारों'', ''जीत ही लेगें बाजी हम तुम'', ''कभी कभी मेरे दिल में'', '' आजा रे ओ मेरे दिलबर आजा'', '' दिल चीज क्या है'',''न जाने क्या हुआ'',''फिर छिड़ी रात'',''ए दिले नादाँन'' , '' हज़ार राहें मुड़ कर देखी'', ''प्यार का दर्द'' '' यह क्या जगह हैं दोस्तों'' आदि अनेको गीत शामिल हैं.
पिछले दिनों खैय्याम साहब को ''फ़िल्म फेयर'' की ओर से २०१० का ''लाइफ टाइम अचीवमेंट'' अवार्ड मिला है, उन्हें यह अवार्ड गायिका आशा भोसलें के हाथों मिला, इस अवार्ड के बारें में पूछने पर उन्होंने कहा कि, '' बहुत ही अच्छा लगा यह अवार्ड पाकर, जब भी कोई अवार्ड मिलता है तो बहुत ही ख़ुशी होती है, इस अवार्ड के बारें में बहुत लोगो ने कहा कि यह अवार्ड देर से मिला है मुझे, लेकिन मुझे किसी से कोई भी शिकायत नहीं है क्योंकि मेरा मानना है कि हर चीज का अपना वक्त होता है और अब मेरा वक्त आया है.'' आशा भोसलें के बारें में उन्होंने कहा कि,'' आशा जी बहुत ही गजब का गाती हैं, फ़िल्म ''उमराव जान'' की गज़लों को अपनी आवाज में गाकर उन्होंने अमर बना दिया है. मैंने उन्हें फ़िल्म ''फुटपाथ' में कैबरे डांसर का गीत गवाया और नायिका मीना कुमारी के लिए भी मैंने ही उनसे गीतों को गवाया.''
८३ साल की आयु में भी उनमे जो गजब का उत्साह व उमंग हैं वो देखते ही बनता है. बातों के बीच - बीच में खैय्याम साहब कभी जोश में आ जाते हैं और गीतों को गुनगुनाना भी शुरू कर देते हैं. उनसे बात करते समय आपको कुछ भी बोलने की जरुरत नहीं होती वो अपने आप ही सब बताते जाते हैं.उन्होंने बताया कि, ''बेगम अख्तर साहिबा ने भी उनके साथ गाने की ख्वाहिश जाहिर की, जब बेगम अख्तर साहिबा ६० साल की थी तब उन्होंने ''मेरे हम सफ़र मेरे हम नवा, मुझे दोस्त बन के दगा न दे'' ग़ज़ल की रिकार्डिंग की और कहा कि, ''इस ग़ज़ल को गाकर मुझे आज ऐसा लगा कि जैसे आज मेरी आवाज ६० साल की नहीं बल्कि २४ साल की हो गयी है. आज मेरी आवाज को खैय्याम ने जवान कर दिया है''
लता दीदी के बारें में खैय्याम साहब ने बताया कि, ''वो जादू है, उसकी आवाज एक जादू है, जब मैंने फ़िल्म ''रजिया सुलतान'' का गीत ''ऐ दिले नादाँन'' बनाया और लता ने उसे गाया, यह गीत उसे बहुत ही अच्छा लगा, उसे जब भी कोई धुन पसंद आती है तो वो कुछ कहती नहीं बल्कि उसके गाल लाल हो जातें हैं वो मुस्कुराती है तब हम समझ जाते है कि उसे धुन बहुत ही अच्छी लगी है.''
खैय्याम साहब ने फिल्मों में तो शानदार संगीत दिया है इसके साथ-साथ उन्होंने कई टी वी धारावाहिकों में भी शानदार संगीत दिया है. उन्होंने ग्रेट मराठा, दर्द, सुनहरे वर्क्स, बिखरी याद बिखरी प्रीत के अलावा धार्मिक धारावाहिक ''जय हनुमान'' में बैक ग्राउंड'' संगीत दिया. इसके लिए इन्हें बहुत ही सराहना मिली. १९७७ में फ़िल्म ''कभी कभी'' व १९८२ में ''उमराव जान'' के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत का उन्हें फ़िल्म फेयर अवार्ड मिला. उन्होंने बताया कि, '' इस फ़िल्म के लिए एक ओर जहाँ शायराना संगीत दिया “कभी-कभी मेरे दिल में” गीत के लिए, वहीँ दूसरी ओर नौ जवानों के लिए ''तेरे चेहरे से'' गीत की भी धुन बनायीं.'' बहुत कम लोग जानते हैं कि फ़िल्मी गीतों में ''नज्म'' को खैय्याम साहब ने ही लोकप्रिय किया है. फ़िल्म ''कभी कभी'' के दो गीत ''मैं पल दो पल का'' और ''मेरे घर आयी एक नन्ही परी'' दोनों ही बहुत लोकप्रिय हुए, ये दोनों हो नज्म हैं.
इनकी पत्नी जगजीत कौर जो कि खुद एक लोकप्रिय गायिका हैं, के बारें में उन्होंने बताया कि, जगजीत का बहुत ही बढा हाथ हैं जो मैं आज यहाँ तक पहुंचा हूँ, इनका फ़िल्म ''शगुन'' का गाया गीत ''तुम अपना रंजो गम'' बहुत ही लोकप्रिय हुआ. इसी तरह ''देख लो आज हमको जी भर के'' व '' काहे को बियाही बिदेस'' भी बहुत ही लोकप्रिय हुए हैं, यही नहीं जब भी मैं किसी फ़िल्म का संगीत तैयार करता हूँ तो जगजीत का मुझे ही मदद करती है. जब मैं फ़िल्म ''उमराव जान'' का संगीत तैयार कर रहा था तब भी हम आपस में बहुत बहस करते थे तब जाकर कोई धुन बनती थी. ''जिन्दगी तेरी बज्म में'' फ़िल्म ''उमराव जान'' की ग़ज़ल को वास्तव में जगजीत ने ही बनाया है.''