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Sunday, September 20, 2009

’डांडिया मस्ती’ में मस्त होकर नाचे लोग


शारदीय नवरात्र आरम्भ हो चुके हैं और इसके साथ ही दांडिया महोत्सव भी शरू हो गया है. डांडिया महोत्सव को ध्यान में रखते हुए राजधानी दिल्ली में भी जगह - जगह गरबा व डांडिया रास का आयोजन हो रहा है.ऐसे ही एक भव्य डांडिया समारोह का आयोजन सहकार नामक एन जी ओ ने नेल्सन मंडेला मार्ग, वसंत कुंज में स्थित प्रोमेनेड डी एल एफ में किया. ''डांडिया मस्ती'' नामक इस डांडिया समारोह में रंग बिरंगे परिधान पहने हजारो की संख्या में लोग शामिल हुयें.
१८ सितम्बर से २८ सितम्बर यानि दस दिनों तक चलने वाले इस ''डांडिया मस्ती'' का जबकि कल पहला ही दिन था लेकिन फिर भी इसमें शामिल होने के लिए लोग दूर दूर से आये हुए थे. आयोजको ने इस समारोह में विशेष रूप से अहमदाबाद के लोकप्रिय डांडिया बैंड को बुलाया था. डांडिया नृत्य को और अधिक मनोरंजक बनाने के लिये १५ ग्रुपो ने भी ''डांडिया प्रतियोगिता में भाग लिया. शामिल प्रतियोगियों में से डांडिया क्वीन, डांडिया किंग व डांडिया कपिल को चुनकर सभी को ५ -५ हजार रूपए भी दिये गये.
पिछले ११ साल से आयोजित हो रहे इस समारोह में लोगोनेपारम्परिक गुजराती खाने का जी भर कर आनंद उठाया. गुजरात टूरिज्म और गुर्जरी व गुजरात हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन ने भी इस ''डांडिया मस्ती'' समारोह में अपने स्टाल लगा रखे थे, लोगो ने इन स्टालों से भी जम कर खरीदारी की.

Saturday, September 19, 2009

’डू नॉट डिस्टर्ब’ भी हिट होगी - गोविन्दा



गोविंदा की फिल्मों का नाम लेते ही सबके चेहरे पर हसीं आ जाती है क्योंकि उनकी जितनी भी फिल्में आयी है उन सभी में भरपूर मनोरंजन होता है. और अगर गोविंदा के साथ डेविड धवन का नाम जुडा हो तो जैसे सोने पे सुहागा. गोविंदा व डेविड ने दर्शको को एक से बड़ कर एक पारिवारिक, मनोरंजक व हास्य फिल्में दी है जिनमे शोला और शबनम, हसीना मान जायेगी, दीवाना मस्ताना, अंदाज, आखें, राजा बाबू, सजान चले ससुराल, कुवारा, कुली नंबर १, जोड़ी नंबर १, छोटे मियां बड़े मियां व पार्टनर प्रमुख हैं. पार्टनर फिल्म के बारे में तो यह कहा जा सकता है कि इस फिल्म के द्वारा ही गोविंदा ने फिर से अपना करियर शुरू किया. इस समय गोविंदा चर्चा में है निर्माता वाशु भगनानी की फिल्म ''डू नॉट डिस्टर्ब'' को लेकर. बिग पिक्चर्स एंड पूजा इंटरटेनमेंट इंडिया लिमिटेड प्रेजेंट्स की शीघ्र आने वाली फिल्म के निर्देशक हैं डेविड धवन. गोविंदा से मुलाकात हुई और बातें हुई उनकी इसी फिल्म को लेकर. प्रस्तुत हैं कुछ अंश ---
· अपनी इस फिल्म के बारें में बताइये, क्या कहानी है इसकी?
हास्य फिल्म है ''डू नॉट डिस्टर्ब'', मैं बहुत ही अमीर बिजनिस मैन है उसकी एक खूबसूरत पत्नी है लेकिन उसका प्रेम सम्बन्ध एक सुपर मॉडल से हो जाता है और फिर उस बेचारे का क्या होता है ? यही है मेरी इस फिल्म की कहानी, जिसका निर्देशन किया है मेरे दोस्त डेविड ने और फिल्म का निर्माण किया है वाशु जी ने, जिनके साथ मैं पहले भी काम कर चुका हूँ.
· आपने निर्माता वाशु भगनानी के साथ भी काफी अरसे बाद काम किया है?
करीब दस साल ही गये जब फिल्म ''छोटे मियां बड़े मियां'' आयी थी,यह फिल्म वाशु जी की ही थी इससे पहले मैंने उनके साथ कुली नंबर १ व हीरो नंबर १ में काम किया था. यह सभी फिल्में हिट रही थी और मुझे पूरा यकीन है कि यह भी हिट होगी.
· आपके साथ फिल्म में सुष्मिता भी हैं सुना है उनके और आपके बीच कुछ प्रोब्लम है इसलिए शूट पर भी दिक्कत आयी?
ऐसा कुछ भी नहीं है मेरे और सुष्मिता के बीच, हम दोनों ने पहले भी साथ काम किया है हमारी जोड़ी को भी दर्शको ने बहुत पसंद किया है, फिल्म भी हिट रही थी और मुझे पूरी उम्मीद है यह फिल्म भी दर्शक पसंद करेगें.
· आपके साथ लारा दत्ता भी है, बताइये कुछ उनके बारे में?
लारा फिल्म में मेरी प्रेमिका बनी हैं बहुत ही अच्छा काम किया है लारा ने. मैं उनके साथ पार्टनर में भी काम कर चुका हूँ.
· आपने तो अधिकतर हास्य फिल्मों में ही काम किया है तो यह फिल्म आपकी पिछली फिल्मों से किस तरह अलग है?
बहुत ही अलग है मेरी यह फिल्म ''डू नॉट डिस्टर्ब'', क्योंकि डेविड ने फिल्म ही ऐसी बनाई है जो कि दर्शको को नॉन स्टाप हंसायेगी. इसके अलावा मेरे साथ इस फिल्म में कुछ ऐसे कलाकार हैं जिनके साथ मैंने पहली ही बार काम किया है जैसे रितेश, रणवीर शोरे आदि.
· रितेश तो आपको ''किंग ऑफ़ कॉमेडी'' कहते हैं तो कैसा रहा उनके साथ काम करना?
मजा आया, रितेश बहुत ही अच्छा काम करता है, मैंने उसकी ''हे बेबी'' व ''मस्ती'' फिल्में देखी हैं दोनों में ही उसने शानदार काम किया है. में उसको उस समय से जानता हूँ जब वो छोटा था.
· आपने मणिरत्नम की फिल्म ''रावण'' में भी काम किया है?
हाँ इस फिल्म में मैंने लक्ष्मण की भूमिका की है, यह फिल्म मेरी दूसरी फिल्मों से बिल्कुल ही अलग है. मणि सर के साथ हर कोई काम करना चाहता है मैं भी चाहता था, इस फिल्म में काम करके मेरा सपना पूरा हो गया.
· पार्टनर फिल्म का सीकुअल बन रही थी क्या हुआ?
डेविड और सलमान दोनों ही व्यस्त हैं इसलिए देर हो रही है.
· सुना है आपकी बेटी नर्मदा भी फिल्मों में आ रही है क्या कुछ बताएगें कब तक आएगी उनकी फिल्म?
अभी वो बहुत छोटी है इसके साथ ही वो सही फिल्म व सही भूमिका का इन्तजार कर रही है.

-मीनाक्षी शर्मा

Monday, September 14, 2009

हिन्दी दिवस की बहुत - बहुत शुभकामनाएं

समस्त हिन्दी ब्लॉगरों को आज हिन्दी दिवस पर मेरी ओर से बहुत - बहुत शुभकामनाएं । आज हम सभी इस बात को अच्छी तरह से जानते व समझते हैं कि आज अपने ही घर में अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए राष्ट्र भाषा हिन्दी को कितने जतन करने पड़ रहे हैं । लेकिन यह देखकर खुशी होती है कि ऎसे कठिन दौर में हिन्दी का अस्तित्व बनाए रखने के लिए तथा इसके प्रचार - प्रसार के लिए हिन्दी भाषी ब्लॉगरों ने काफी मेहनत मशक्कत की है , उसी का परिणाम है कि आज इंटरनेट पर हिन्दी भाषा का सम्मान करने वाले हिन्दी भाषी ब्लॉगरों की धूम मची है ।
सिर्फ इतना ही नहीं आज इंटरनेट पर अंग्रेजी के साथ - साथ हिन्दी भाषा की तमाम साइटें भरी पडी़ है ।

Friday, September 11, 2009

बोबी के साथ काम करना अच्छा लगा : कंगना रानावत


कंगना रानावत ने फिल्मों में आने से पहले दिल्ली के ''अश्मिता थियेटर ग्रुप'' के साथ कुछ नाटक किये और फिर मुंबई की ओर कदम रखा जहाँ उन्होंने आशा चंद्रा के अभिनय स्कूल से तीन महीने का अभिनय कोर्स किया. मुंबई में ही निर्देशक अनुराग बासु ने उन्हें एक काफी शॉप मे देखा और अपनी फिल्म ''गैंगस्टर'' मे मुख्य भूमिका के लिये ऑफर किया. इस तरह कंगना ने २००६ मे फिल्म ''गैंगस्टर'' से अभिनय सफ़र शुरू किया. इस फिल्म में दर्शकों ने उन्हें पसंद किया. इस फिल्म के बाद उन्होंने ''वो लम्हें'' फिल्म में परवीन बोबी की भूमिका अभिनीत की. फिर उन्होंने ''लाइफ इन ए मेट्रो'' ,''शाकालाका बूम बूम'', ''फैशन'' , ''राज द मिस्ट्री'' आदि फिल्मों मे काम किया. कंगना को उनके अभिनय के लिए कई अवार्ड भी मिल चुके हैं जिनमें फिल्म ''फैशन'' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहनायिका का फिल्म फेयर अवार्ड प्रमुख है. जल्दी ही उनकी एक फिल्म आ रही है ''वादा रहा''. इस फिल्म वो बोबी देओल के साथ हैं. इसी फिल्म के सिलसिले में उनसे बातचीत हुई ----
• फिल्म ''वादा रहा'' के बारे में बताइए?
-नेक्स्ट जेन फिल्म्स प्रजेंट्स व टॉप एंगल प्रोडक्शन की फिल्म है ''वादा रहा-- आई प्रोमिस'', इस फिल्म को निर्देशित किया है समीर कार्निक ने. समीर कार्निक ने इससे पहले ''नन्हें जेसलमेर'' व ''हीरोज'' आदि फिल्मों का निर्देशन किया है. इस फिल्म में मैं बोबी देओल की प्रेमिका बनी हूँ. फिल्म में अतुल कुलकर्णी व द्विज यादव भी हैं. फिल्म के गीत लिखे हैं बब्बू मान, तुराज, संदीप नाथ, राहुल बी सेठ एंड सैंडी ने. फिल्म में संगीत कई संगीतकारों बब्बू मान, तोशी-- शारीब, मोंटी, राहुल बी सेठ एंड सैंडी, संजोय चोधरी ने दिया है.
• कहानी क्या है फिल्म की?
-मैं और बोबी आपस में प्यार करते है. बोबी डॉक्टर बने हैं. आशा निराशा के बीच की जंग दिखाई है फिल्म में. बहुत ही खूबसूरत फिल्म बनाई है समीर कार्निक ने. भावनात्मक फिल्म है, दर्शको को पसंद आएगी.
• निर्देशक समीर व बोबी दोनों के ही साथ आपने पहली ही बार काम किया है, कैसा रहा उनके साथ काम करना?
-जैसा मैंने पहले भी बताया कि समीर ने बहुत ही जबरदस्त फिल्म बनाई है, अच्छा रहा उनके साथ काम करना. बोबी के साथ मैंने पहले ही बार काम किया है लेकिन ऐसा लगा नहीं कि पहली ही बार हमने साथ काम किया हो. अच्छी जोड़ी लगी है हमारी.
• फिल्म ''काईट्स'' के बारे में बताईये?
-मैं इस फिल्म में सालसा डांसर बनी हूँ. यह भूमिका मेरी पिछली भूमिकाओ से बिलकुल ही अलग है. मैं शूट पर रितिक रोशन से डांस के स्टेप भी सीखती थी. अच्छी फिल्म है ''काईट्स''.
• आपकी आने वाली फिल्में कौन सी हैं?
- ''वन्स अपोन ए टाइम'' ,'' अनीस बज्मी की '' नॉ प्रॉब्लम'', आनंद राय की ''तनु मीट्स मनु'' व ''एक निरंजन'' मेरी आने वाली फिल्में हैं. इन सभी फिल्मों में मैंने अलग अलग तरह की भूमिकाये की है. ''नॉ प्रॉब्लम'' हास्य फिल्म है मैंने इससे पहले कभी हास्य फिल्म में काम नहीं किया, सुष्मिता सेन के साथ शूट पर बहुत ही मजे किये.
• फिल्म ''गैंगस्टर'' से शुरू हुआ आपका यह अभिनय सफ़र यहाँ तक पंहुचा है कैसा रहा अब तक का यह सफ़र?
-बहुत ही अच्छा, मुझे पहली ही फिल्म अनुराग बासु जैसे निर्देशक के साथ करने को मिली. उनके साथ मैंने तीन फिल्में की है. इसके अलावा महेश भट्ट जैसे बड़े निर्देशक के साथ भी मैंने काम किया है. अभी मैं कई बड़ी व अच्छी फिल्में कर रही हूँ .

Thursday, September 10, 2009

Wednesday, September 9, 2009

अभी बहुत सारे अवार्ड लेने बाकी हैं : ओमपुरी

अभिनेता ओम पुरी ने जब भी किसी भूमिका को अभिनीत किया है तो पूरी तरह से उसमें डूबकर। तभी तो उन्हें अभिनय के लिए दो बार राष्ट्रीय पुरुस्कार, फिल्म फेयर अवार्ड, लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड व पद्मश्री जैसे अनेको सम्मानीय अवार्ड मिलचुके हैं। रिद्धि सिद्धि द्वारा प्रस्तुत फिल्म ''बाबर'' में उन्होंने फिर एक बार दरोगा की भूमिका अभिनीत की है अब तक वह ३० बार पुलिस ऑफिसर की भूमिका कर चुके हैं फिल्म ''बाबर'' में वह दरोगा बने हैं
।पिछले दिनों नॉएडा के मारवाह स्टूडियो में इसी फिल्म के सिलसिले उनसे बातचीत हुई.प्रस्तुत हैं बातचीत के कुछ अंश-------
· ''बाबर'' में एक बार फिर पुलिस के दरोगा बने है क्या कोई ख़ास वजह इसकी?
-ख़ास वजह तो यही है कि मैं फिर से पुलिस वाला बना हूँ फिल्म ''बाबर में, पता नहीं अभी कितनी बार और बनूंगा.
· अर्धसत्य से लेकर अब तक आप अनेको बार पुलिस वाले की भूमिका कर चुके हैं कैसा रहा अब तक का सफ़र?
-फिल्म ''अर्धसत्य'' से शुरू हुआ पुलिस की भूमिका का यह सफ़र बहुत ही अच्छा रहा. मैंने अच्छे व बुरे दोनों ही तरह के पुलिस ऑफिसर की भूमिका की है. ''अर्धसत्य'' में मैं ईमानदार पुलिस ऑफिसर बना था जबकि इस फिल्म ''बाबर'' में भ्रष्ट दरोगा बना हूँ, जो कि अपराधी की मदद करता है उसके साथ बैठ कर चाय पीता है. बाद में उसे अपने रास्ते से हटाने से भी झिझकता नहीं हैं. मजा आया चतुर्वेदी के चरित्र को अभिनीत करके. वास्तव में ऐसे दरोगा होते हैं.
· फिल्म ''बाबर'' की कहानी बताइए?
-यह कहानी है एक ऐसे लड़के बाबर की, जो कि १२ साल की छोटी सी उम्र में हत्या कर देता है और अपराध के इस सफर मे चलते हुए वो माफिया बन जाता है.
· इस फिल्म में आपके साथ मिथुन दा भी है, कैसा रहा उनके साथ काम करके?
-बहुत ही मजा आया शूट पर, कैसे अभिनेता हैं वह आप सभी जानते हैं मुझे यह बताने की जरुरत नहीं हैं. मुझे ''देव'' फिल्म मे बिग बी के साथ भी बहुत मजा आया था. ''मकबूल'' फिल्म में पुलिस वाले की भूमिका को करते समय शूट पर मैंने व नसीर ने बहुत ही मजे किये.
· फिल्म की किसी भूमिका का असर आपकी निजी जिन्दगी पर भी पड़ता है?
- बस ''अर्धसत्य'' के पुलिस ऑफिसर का चरित्र मुझे प्रभावित करता है. बाकि तो जब तक मैं शूट पर रहता हूँ तभी तक उसका प्रभाव रहता है जैसे ही शूट ख़त्म हुआ असर ख़त्म और मैं वापस ओम पुरी.
· ''बाबर'' के निर्देशक आशु त्रिखा के साथ कैसा रहा काम करना?
-आशु ने अच्छी कहानी चुनी है फिल्म की. एक वास्तविक कहानी पर फिल्म बनाना और उसे वास्तविक लोकेशन पर शूट करना कोई आसान काम नहीं हैं. दर्शको को पसंद आएगी ''बाबर'' फिल्म.
· आपकी कौन कौन सी फिल्में आने वाली हैं?
-''लन्दन ड्रीम्स'' ,''रोड टू संगम'', ''वांटेड'' व इस प्यार को क्या नाम दूं'' मेरी आने वाली फिल्में हैं.
· आपको राष्ट्रीय पुरुस्कार, फिल्मफेयर, पदमश्री व लाइफ टाइम अचीवमेंट आदि अनेको अवार्ड मिल चुके हैं अब क्या चाहते है?
-अभी बहुत सारे अवार्ड बचे हैं जैसे जैसे मिलेगें तब मैं उसके में बात करूगां, अभी नहीं.

Saturday, September 5, 2009

नत- मस्तक हो शत - शत प्रणाम मेरे को

आज शिक्षक दिवस है । आज मैं अपने उन सभी गुरुओं को यादकर उन्हें बार बार नमन करती हूं जिनसे आज मैं बहुत दूर हो चुकी हूं , आज सिर्फ उनकी यादें शेष हैं ।
हं मैं अपनी एक गुरू डॉक्टर शशि तिवारी के करीब हूं जिन्हें मैं शिक्षक दिवस की बधाई देती हूं । इस समय मैं डॉक्टर तिवारी के निर्देशन में पी. एच डी कर रही हूं ।
इसके अलावा मैं अपने ब्लॉगिंग गुरुओं को भी बधाई देती हूं जिनसे मैं जाने - अनजाने आए दिन कुछ न कुछ नया सीखती हूं और उनसे मुझे ब्लॉग पर टिपियाने की सीख व जोश मिलता रहता है । विशेष रूप से यहां मैं ब्लॉगिंग गुरू की श्रेणी में ”हिन्दी ब्लॉग टिप्स” को रखना चाहूंगी जिनके सम्पर्क में रहकर मुझे आएदिन ब्लॉग पर कुछ न कुछ नया करने व सीख्ने को मिल रहा है ।
HAPPY TEACHERS DAY

लाजबाव होती है फ्रूट परेड




समूचे विश्व में नजर डालो तो पता चल जाएगा कि लोगों में एक से बढ़कर एक कलाकारी का जुनून भरा पडा़ है । उनकी कलाकारी ऎसे - ऎसे करतब देखने को मिल जाएंगे जो किसी ने सोचा तक न हो । ऎसा ही एक बेजोड़ नमूना आपको देख्ने के लिए मिल जाएग नीदरर्लैंड में । जी हां नीदरलॆंड के एक शहर ताइल में हर वर्ष सितम्बर माह के दूसरे शनिवार को एक अजीबोगरीब फैस्टिवल मनाया जाता है जिसे फ्रूट परेड अथव फ्रूट कोरसो के नाम से जाना जाता है । इसमें शहर के लोग अपने - अपने तरीके से विभिन्न प्रकार के फ्रूट को विभिन्न डिजाइनों में अपने - अपने वाहनों में सजाकर लोगों के सामने पेश करते हैं । वास्तव में उनकी कलाकारी का प्रदर्शन कितना सुंदर और नायाब होता है यह तो परेड देखकर स्वत: ही लग जाता है ।
इस बार फ्रूट परेड का आयोजन १२ सितम्बर को किया जा रहा है । यह ४९वां समारोह है जो कि लोगों के बीच काफी प्रसिद्धि पा चुका है ।यहां आपके सामने पिछ्ली फ्रूट परेड के कुछ चित्र हैं जो आपको फ्रूट परेड में ले जाएंगे ।

Friday, August 21, 2009

मंत्रों में शक्ति

हमारे जो ब्लॉगर मंत्रों में विश्वास रखते हैं उनके लिए यह बहुत अच्छी खबर है , और जो विश्वास नहीं करते वे इसे आजमा कर देख लें तो कोई हर्ज नही है।एक ओर जहां मेडिकल साइंस तरह - तरह की खोज करके विभिन्न तरह की बीमारियों का इलाज सरल से सरल व त्वरित आराम के नुस्खे तलाश करने में जुटी हुई है । वहीं दूसरी ओर बाबा रामदेव योग और आयुर्वेद के माध्यम से लाइलाज बीमारियों का सफल इलाज करने का दावा कर रहे हैं । वहीं इधर ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी तमाम कष्टों का उपाय मंत्रों से करने का दम भर रहे हैं ।उनके अनुसार आज देशभर में लोग तरह - तरह की बीमारियों से बेहद पीडित हैं ऎसे समय में उन्होंने अपने मंत्रों के चमत्कारी प्रभाव को जनकल्याण के लिए लोगों तक पहुंचाने का बीडा़ उठाया है । वह बताते हैं कि स्वाइन फ्लू से लेकर सांस आदि जैसी अन्य खतरनाक बीमारियों का इलाज उनके दिव्य बीज मंत्रों तथा आयुर्वेदिक दवा से संभव है। स्वामीजी ने अपनी बीज मंत्र से सबंधित चिकित्सा पद्धति खास से लेकर आम जन तक पहुंचाने के लिये पिछले दिनों यहां कांस्टीट्यूशन क्लब में पत्रकारों से बात की । इस बातचीत के दौरान उन्होंने उन लोगों के लिखित पत्र भी दिखाए जिन्हें स्वामीजी से मंत्र प्राप्त करने के बाद अलग - अलग दिशाओं में आराम मिला अथवा फायदा हुआ । स्वामीजी के अनुसार उनकी यह मंत्र चिकित्सा पद्धति ना सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में काफी सराही गई है ।
एक जवाब में भगवान लक्ष्मी नारायण धाम के पथ प्रणेता स्वामीजी ने बताया कि तुलसी के ५-६ पत्ते,एक पत्ता पुदीना और अदरक ,इन तीनॊं का रस निकालकर तथा इस रस के बराबर शहद मिलाकर पेस्ट तैयार करें । अब अपने धर्म के अनुसार अपने प्रभु को याद करें फिर स्वामीजी से लिया हुआ बीज मंत्र का नौ बार जाप करने के पश्चात तैयार दवा को पी लें । लगभग दो - तीन दिनों में ही स्वाइन फ्लू ही नहीं जो भी बीमारी होगी उससे आप मुक्त हो जायेंगे । उन्होंने अपने मंत्रोपचार पर जोर देते हुए कहा कि जहां डॉक्टर हार जाते हैं तब वे भी मरीज को दुआ करने की सलाह देते हैं ।
स्वामी विभिन्न टी वी चैनलो पर प्रतिदिन समागम करते हैं इसके अलावा वे जगह - जगह दुख निवारण समागम भी करते रहते हैं जहां लोग उनसे मिलकर अपनी परेशानी बताते हैं तब स्वामीजी उन्हें बीज मंत्र देते हैं । इनका अगला समागम१२-१३ सितंबर को पंजाब , १९ - २० सितंबर को हिमांचल प्रदेश में होगा । ट्रस्ट द्वारा प्रभु कृपा नाम से एक मासिक पत्रिका का प्रकाशन भी दिल्ली से किया जा रहा है ।

Thursday, August 20, 2009

सरनेम तेरी महिमा अपरंपार

आज मैं चोखेरबाली ब्लॉग पर गई और प्रतिभाजी द्वारा उठाए गए मुद्दे ’सरनेम की महिमा’ पढा ,वाकई प्रतिभाजी ने यह बहुत ज्वलंत मुद्दा उठाया है।इसे पढकर मुझे भी एक वाकया याद आ गया , मैं शादी से पहले अखबार के दफ्तर में काम कर चुकी हूं तब मैं सरनेम सिंघल की जगह अग्रवाल लगाती थी । खैर शादी के बाद मेरे कुछ सहकर्मियों को इस बात की जानकारी नहीं थी सो एक्बार मेरे एक सह्कर्मी का फोन आया तो मेरे पति ने ही फोन रिसीव किया , मेरे I सहकर्मी ने मुझे मेरे पहले के सरनेम से याद किया उस वक्त तो मेरे पतिदेव ने मुझे फोन का रिसीवर दे दिया लेकिन बाद में सरनेम को लेकर मेरी काफी खिंचाई की । उस समय मैंने इस बाद को तूल देने की बजाए वहीं खत्म किया लेकिन मुझे इस बात का एहसास भी हो गया कि पुरुष वर्ग कितनी भी खुली मानसिकता वाला बने लेकिन एसा होता नहीं है ।
इस समाज में पुरुष वर्ग स्वयं को भले ही कितना खुले विचारों का कह ले , मगर आज भी वह पुरानी सदी के दकियानूसी विचारों की गिरफ्त से बाहर नहीं निकल पाया है । हां , वह खुले दिमाग का है जरूर किंतु बाहरी दुनिया के लिए । जब अपने घर की बात आती है तो उसे साडी में लिपटी और पति की हर बात को सर झुका कर मानने वाली अनपढ नहीं किंतु अनपढ सरीखी बीबी की दरकार होती है । जबकि घर से बाहर वह एड्वांस लडकी में अपनी बीबी को तलाशता है या कहिए कि उसे वही लडकी सबसे अच्छी लगती है । आज के पुरुष दोहरी चाल चलते नजर आते हैं , एक ओर तो उन्हें कमाऊ बीबी की तलाश रहती है , वहीं दूसरी ओर वे बीबी का किसी भी पर पुरुष से बोलना - हंसना जरा भी पसंद नहीं करते । अब चूंकि बात उठी है पत्नी द्वारा शादी के बाद सरनेम न बदलने पर परिवार के टूटने की , मतलब या तो पत्नी सरनेम बदले अन्यथा पतिदेव नाराज होकर तलाक दे देंगे । यानि पतिदेव को इसमे अप्ना अहं और अपना अस्तित्व नजर आता है उसकी नजरो में पत्नी की कोई अहमियत नहीं ।मैं पूछती हूं कि आखिर पतियों को यह हक किसने दिया है ? क्या किसी मैरिज एक्ट में ेसा लिखा गया है ? जबकि मेरि समझ से शादी के बंधन मे बंधते समय पति - पत्नी दोनोसे एक - दूसरे का ख्याल रखने सबंधी सात वचन लिए जाते हैं नाकि पति दवारा पत्नी पर अपनी मनमानियां थोपने के । दरअसल सदियों से पुरुष्वादी मानसिकता ही अपना एकछत्र राज करती आई है जिसने कदम - कदम पर स्त्रियों को नीचा दिखाने तथा अपने प्रभुत्व मे जकड कर रखा है । आज भले ही समय ने करवट ले ली है और स्त्रियों ने सदियों से चली आ रही पुरुषवादी मानसिकता पर काफी हदतक अंकुश लगाया है लेकिन फिर भी आए दिन पुरुषों की ओछी मानसिकता के दर्शन होते ही रहते हैं । मैं कहती हूं कि यदि पत्नी को शादी के बाद सरनेम बदलने से कुछ प्फर्क न पडता हो तो सरनेम बदलने में कोई हर्ज नही । लेकिन हां , कईबार नौकरीपेशा पत्नी को सरनेम बदलना बहुत मुश्किल हो जाता है उसे तमाम कागजाती कार्यवाहियों से दो - चार होना पडता है एसी परिस्तिथियों में पति को पत्नी का साथ देना चाहिए ना कि सरनेम को अपनी मूंछ का सवाल बनाए । यदि जो पति अपनी पत्नी की इस पीडा को न समझे और अपनी बात पर डटा रहे तो ऎसे पति को सबक सिखाना भी बहुत जरूरी है । अतः अमुक बहन अपनी आवश्यकता को जांचे और उचित कदम उठाने से न घबराएं ।