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Friday, August 7, 2009

Numbers




Letter D comes for the first time in Hundred

Letters A, B and C do not appear anywhere in the spellings of 1 to 999

Letter A comes for the first time in Thousand

Letters B and C do not appear anywhere in the spellings of 1 to 999,999,999

Letter B comes for the first time in Billion

AndLetter C does not appear anywhere in in the spellings of entire English Counting

Sunday, August 2, 2009

हैप्पी प

मेरे सभी ब्लॉगर साथियों को दोस्ती का यह दिन बहुत - बहुत मुबारक हो
आज अवकाश का दिन होने की वजह से कई दोस्तों की मनोकामनाएं मन की मन में रह गई होंगी । वह जिस तरह इस दिन को मनाने की हसरत कर रहे होंगे उनकी वो हसरत पूरी होने में इस रविवार ने खलल डाल दी । खैर मायूस होने की किसी को कोई जरूरत नही है । यह दोस्ती का दिन एक नहीं पूरे सप्ताह भर मनाया जाता है ।आज इस मौके पर शोले फिल्म का गाना ”ये दोस्ती हम नहीं भूलेंगे...........”

Saturday, August 1, 2009

चेस फिल्म की शूटिंग के दौरान अनुज सक्सॆना घायल हुए

पिछले सप्ताह मुंबई स्थित बर्सोवा के खोजा में चल रही निर्देशक जगमोहन मुंदरा की फिल्म ’चेस’ की शूटिंग के समय अनुज सक्सेना को चोट लग गई । जिस समय अनुज को चोट लगी तब वह एक एक्शन सीन शूट कर रहे थे । उन्हें लडाई के एक सीन में सोफे पर गिरना था , सोफे पर गिरये समय अनुज के सिर में सोफे कीलकडी लग गई और उनके सिर से खून बहने लगा । लेकिन फिल्म यूनिट के सदस्यॊं ने तत्परता दिखा कर अनुज को तुरंत मेडीकल की व्यवस्था दिलाई । जिससे अनुज अब ठीक हैं और ऐसा कहा जाता है कि वे कल १ अगस्त को कश्मीर में होने वाली शूटिंग में भी चले गये हैं । ईश्वर करे वह जल्दी ही एकदम ठीक हों औरफिल्म यूनिट के सदस्यों को होने वाली दिक्कतों से बचाएं।वैसे तो अनुज ने काफी हिम्मत दिखाई है । उन्हें बहुत - बहुत धन्यवाद !

Friday, July 31, 2009

फ़िल्म जगत में मना मुंशी प्रेमचंद्र का जन्म दिवस

हिन्दी जगत में प्राख्यात रहे साहित्यकार - उपन्यास्कार मुंशी प्रेमचंद्र का कल ३० जुलाई को १२९ वां जन्म दिवस मनाया गया । यह बात हमारे हिन्दी साहित्य जगत के नुमाइंदों को शायद याद नहीं रही या फिर उन्होंने मुंशी जी को याद करने की जरूरत नहीं समझी तभी तो कहीं से भी मुंशी जी को याद करने की सुगबुगाहट सुनाई नहीं दी । लेकिन भला हो इन फिल्मकारों का , जिन्होंने किसी न किसी रूप में मुंशीजी को याद करके उनकी अहमियत और उनके द्वारा हिन्दी जगत को दिए योगदान को हमसे पुन: रूबरू करा दिया । यूं तो मुंशीजी ने कई हिन्दी उपन्यास लिखे हैं किंतु इस समय मुझे उनका ’गोदान’खूब याद आ रहा है ।
फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने मुंशीजी के जन्म दिवस पर ’गुलदस्ता’ नाम से डीवीडी तथा ३वीसीडी का एक कलेक्शन जारी किया है । इसमें मुंशीजी द्वारा लिखी गईं कहानियों का फिल्मांकन किया है ताकि हमारा युवा वर्ग इन कहानियों से प्रेरणा ले और मुंशीजी की याद को अपने दिलों में संजो कर रख सकें ।

Wednesday, October 22, 2008

काजोल - शाहरुख फिर एक साथ दिखेंगे

काजोल - शाहरूख की लोकप्रिय जोडी़ एक बार फिर फिल्मी पर्दे पर दिखाई देगी ।यह जोडी़ करन जौहर की नई फिल्म ”माय नेम इज खान” में एन आर आई पति - पत्नी की भूमिका में आ रही है । इस जोडी़ की आखिरी फिल्म "कभी खुशी कभी गम” थी ।जाहिर है पिछले कुछ समय से या कहें कि अजय देवगन से शादी के बाद काजोल ने या तो फिल्मों में काम किया ही नहीं और अगर किया भी तो अजय के साथ ही फिल्में कीं । जाहिर है इस जोडी़ ने जो भी फिल्में की वह बॉक्स ऑफिस पर हिट रहीं । अब माय नेम इज खान की कहानी जो भी हो लेकिन इस फिल्म की सफलता में कहीं कोई शक नहीं दिखाई देता है । क्योंकि एक ओर जहॉ निर्माता - निर्देशक के रूप में सफलता की बुलंदियों को छूने वाले व एक से एक हिट फिल्में देने वाले करन जौहेर हैं तो वहीं यह फिल्मी पर्दे की सफल जोडी़ । अब धमाल तो मचेगा ही ।

राज की गिरफ्तारी -- देर आयद , दुरुस्त आयद

राज ठाकरे की गिरफ्तारी तो बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी , खॆर देर आयद , दुरुस्त आयद ,गिरफ्तारी हुई तो राज ठाकरे जैसे नेता इस देश को बर्बादी की ओर ले जा रहे हैं. ऐसे नेताओं को या तो हमेशा के लिए जेल में डाल देना चाहिए या फिर इस देश से निकाल देना चाहिए. ऐसे नेताओं का मक़सद सिर्फ़ आपस में झगडे़ करवाना है और कुछ नही । इन के जैसे नेता कभी भी मुल्क मैं चैन और अमन नही चाहते, कभी जातिवाद, कभी भषवाद और ना जाने किस किस बात पर ये लोग मुल्क का चैन और अमन ख़राब करते रेहते हैं, मैं तो कहती हूँ कि राज ठाकरे और इस के जैसे और सभी नेताओं को या तो इस देश से निकाल दिया जाना चाहिए या फिर इन को राजनीति से बिल्कुल अलग कर देना चाहिए, जो मूल मैं छाई शांति और अमन नही देख सकते और आए दिन कोई ना कोई नया मुद्दा उठाते रहते हैं.राज ठाकरे तो मराठी के नाम पे तो कलंक हैं।हम सभी को कुछ सीखने के लिए येह घटना एक मौक़ा है. याद दिला दे हमारे श्री बलसाहेब ने पहले हिंदुओ की रक्षा करने की कसम खाई थी. तब कुछ साल बाद भा ज पा के साथ मिलकर चुनाव लडे़ जीत कर सरकार भी बनी पर हिंदुओ पर आतच्यार नही रुका । समस्त हिंदू जिन्होंने इनको जिताया था रोने लगे क्यूं की हिंदू की रक्षअ तो दूर उनपर कोई ध्यान नही दिया गया. अब श्री बालासाहेबजी बूढे़ हो गए है.सो अब राज साहेब की बारी थी नया मुद्दा खोज लिया. हिंदी भाषी. इसका क्या मतलाव है की राष्ट्र भाषा को राज्य में प्रयोग न किया जाए? येह एक बेवकूफ़ भारी राज नीति है हवालात की हवा तो बालसाहेब भी खा चुके है. पर दुख की बात तो यह है की छतरपति सिवाजी के प्यारे महारसतीय भाई लोग बिल्कुल हिंदुत्व को हित मे रखने की बदले ग़ैर मराठी मे बह गये है.उम्मीद करते हैं कि इस गिरफ्तारी सेराज ठाकरे व उनके समर्थकों की चूलें हिल जाएंगी और महाराष्ट्र को राज के गुंडाराज से निजात मिल पाएगी ? हम तो कहते हैं कि राज ठाकरे को इस घटना से सबक लेकर अपने में सुधार लाना चाहिए । यही नहीं राज जी को अप्ना शक्ति प्रदर्शन निरीह लोगों व छात्रों पर करने की बजाए आतंकवाद के खात्मे के लिए करना चाहिए । अन्यथा उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि देश की जनता अब उनके जुल्मों को सहन नहीं करेगी ,उनका मुँहतोड़ जवाब देगी ।

Saturday, October 4, 2008

एक खिलाडी़ एक हसीना


एक खिलाडी़ एक ह्सीना , वाह क्या बात है !

हमारे क्रिकेट के खिलाडी़ क्रिकेट पिच पर कोई कमाल कर पाएं या न कर पाएं मगर वे मॉडलिंग के अलावा अब डांस की पिच पर खूब जलवे बिखर रहे हैं । पिछले माह २६ सितम्बर से कलर्स चैनल पर
’ एक खिलाडी़ एक हसीना ’ सीरियल खूब धूम मचा रहा है । इसकी वजह है क्रिकेटरों का हसीनाओ के साथ ताल से ताल मिलाकर थिरकना । इस फील्ड में वे खूब सफल भी हो रहे हैं ।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि क्या क्रिकेट खिलाडि़यों का यह कारनामा बधाई के योग्य है ? एक ओर सरकार इन खिलाडि़यों पर लाखों रुपया खर्च करती है मगर उसके बदले उसे सिवाय पराजय का मुंह देखने के अलावा और कुछ नहीं मिलता । आखिर एसा क्यों ? क्या इस्के जिम्मेदार हमारे ये खिलाडी़ नहीं हैं ? थोडी़ सी भी सफलता पाने पर स्वयं सरकार इन्हें रुपयों से मालामाल कर देती है फिर इन खिलाडि़यों को यह समझ क्यों नहीं आता कि वे सिर्फ और सिर्फ खेल पर ही ध्यान दें । नाम , दाम व काम में वे किसी भी स्टार से कम नहीं हैं , वे तो पूरे भारत के हीरो हैं । फिर वे क्यों खेल से मुंह मोड़ कर मॉडलिंग व फिल्मी दुनिया की चमक - दमक की तरफ आकर्षित हो जाते हैं ?
यह एक ऎसा ज्वलंत मुद्दा है कि इस तरफ सरकार व क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को ध्यान देते हुए कुछ स्ख्त नियम बनाने चाहिए । मेरे विचार से सरकार व बोर्ड को मिलकर यह पॉलिसी तय करनी चाहिए कि यदि कोई भी खिलाडी़ एक खेल जीतकर आता है तो उसका स्वागत सत्कार करके ताड़ के पेड़ पर नहीं चढा़ना चाहिए । खिलाडि़यों की सुख सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाए मगर उन पर इनाम के तौर पर रुपयों की बरसात न की जाए बल्कि उन्हें खेल की बारीकियों से ज्यादा से ज्यादा परिचित कराने की व्यवस्था की जाए । उन्हें ऎसे साधन मुहैया कराए जाएं जिनसे खेल की रणनीति को और पुख्ता बनाया जा सके । दूसरे खिलाडि़यों [किसी भी खेल से सम्बंधित हों ] के मॉडलिंग , टी वी सीरियल्स व फिल्मों में काम करने को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए । यह तय किया जाए कि जो भी खिलाडी़ इस नियम का पालन नहीं करेगा उसे उसके खेल से निकाल दिया जायेगा । यह तय है कि कोई भी व्यक्ति दो या तीन नावों मे सवार होकर सफर करनेब का प्रयास करेगा वह कभी भी अपनी मंजिल को नहीं प सकेगा । ठीक यही बात हमारे खिलाडि़यों पर भी लागू होती है ।
हालांकि किसी की लाइफ में दखलंदाजी करने का हमारा कोई हक नहीं बनता लेकिन जब बात हमारे देश की आन - बान व शान की हो तो चूप भी नहीं रहा जा सकता । अब चूंकि खिलाडी़ हमारे देश की धरोहर हैं और उनके खेल पर देश की शान निर्भर करती है तो उन्की कमियों को सुधारना देश के हर नागरिक का कर्तव्य बन जाता है ।

Sunday, September 28, 2008

मेरी बेटी सबसे प्यारी - सबसे न्यारी


आज बेटियों का दिन है , मैं तो शायद भूल ही गई थी किंतु मुझे मेरी बेटी ने याद दिलाया कि मम्मा आज पता है आपको क्या है --” आज डॉटर डे ” है । मैंने उसे डॉटर डे विश किया । मेरी बेटी बहुत खुश हो गई ।

मेरी हर-संभव यही कोशिश रहती है कि जिन अभावों तथा लड़की होने के कारण मॉं - बाप पर एक बोझ के रूप में मैं पली -बढी़। बचपन से लेकर आज तक मॉं के प्यार के लिए मैं तरस गई हूं ,किंतु कम से कम मैं अपनी बेटी को इतना प्यार दूं कि उसे कभी अपने लड़की होने का मलाल न हो । मेरे पास एक बेटा है और एक बेटी । मै दोनों में कोई फर्क नहीं समझती । मेरे लिए दोनों बराबर हैं ।

इस सबके बावजूद मुझे हर पल एक सवाल परेशान किए रहता है -कि लड़कियॉं तो पराया धन हैं , एक ना एक दिन उन्हें दूसरे घर में जाना ही है । जिस बेटी को हम अपनी ममता की छांव में पाल -पोस कर बढा़ करते हैं और बढे़ होते ही उसे कर देते हैं किसी और के हवाले ,ऎसा क्यों ? माना कि यह परम्परा प्राचीन समय से चली आ रही है और हम सब इस परम्परा का निर्वाह करते चले जा रहे हैं । मगर कया कभी किसी ने ये सोचा है कि बेटियों को ही क्यों परायाधन कहा गया है बेटों को क्यों नहीं ?

आज जब हम लड़के - लड़कियों में कोई फर्क नही मानते , उनका पालन - पोषण भी एक समान करते हैं तो ऎसे में लड़कियों को पराया धन क्यों माना जाए ?यह एक बहस का मुद्दा है ।

क्या कोई मुझे यह बता सकता है कि लड़कियों को परायाधन किसने और क्यों बनाया ?

सही मायने में ”डॉटर्स डे” मनाने के पीछे का मूल कारण यह है कि जो माता - पिता आज भी पुरानी व रूढि़वादी परम्पराओं के चलते लड़कियों को उनके हिस्से का प्यार व हक नहीं दे रहे हैं तथा ऎसे लोग आज भी लड़कियों को बोझ समझते हुए आज भी उन्हें इस दुनिया में आने से पहले ही मारकर उनके जीने का हक छीन रहे हैं । ऎसे लोग खबरदार हों और कन्या भ्रूण - हत्याओं को विराम दें । तभी इस डे को मनाने की सार्थकता होगी अन्यथाआने वाले समय में ऊंट किस करवट बैठेगा यह किसी सेर छिपा नहीं है ..........।

मेरी आठ वर्षीय बेटी ने पिछले दिनों एक पेंटिंग बनाई थी आज में वो पेंटिंग अपने ब्लॉग पर दे रही हूं बताइयेगा कैसी लगी ?

Tuesday, September 23, 2008


लगता है चाइनीज हर कदम पर तथा हर क्षेत्र में भारत तो क्या अन्य देशों को भी पीछे छोड़ रहे हैं । पिछले दिनों हुए बीजिंग ओलम्पिक खेलों में सबसे ज्यादा १०० पदक लेकर चीन ५० से ज्यादा देशों की पदक तालिका में पहले नम्बर रहा , जो कि किसी से छिपा नहीं है । आजकल भारत में चाइनीज आइटमों का ही बोलबाला है । सबसे कम जनसंख्या वाले देश चीन की जितनी तारीफें की जाएं वे कम ही दिखेंगी ।

हाल ही में मिली जानकारी के मुताबिक एक ३६ वर्षीय महिला क्सिया एफेंग के सिर के बाल इतने लंबे हैं कि उसे बाल बनाने के लिए स्टूल पर खडा़ होना पड़ता है । १.६ मीटर लंबी इस महिला के २.४२ मीटर लंबे बाल है । जैसा कि आप चित्र में देख रहे हैं ।